केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा-वापोली धाम से नंदी महाराज आए हैं, लाल बाबाजी ने भेजें हैं

उन्नत कृषि महोत्सव- रायसेन, वापोली धाम के नंदी महाराज बने आकर्षण का केंद्र

प्रांजलकमल याज्ञवल्क्य
सिटी बीट न्यूज नेटवर्क
रायसेन (मध्यप्रदेश)।

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन जिले में चल रहे ‘उन्नत कृषि महोत्सव 2026’ के तहत प्रदर्शनी सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ कर प्रदेश में आधुनिक, नवाचार आधारित एवं तकनीक संचालित कृषि को नई दिशा प्रदान की। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में आधुनिक कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया- वापोली धाम से नंदी महाराज आए हैं, लाल बाबाजी जी ने भेजें हैं

उल्लेखनीय है कि इस महत्वपूर्ण समारोह में रायसेन जिले के उदयपुरा विधानसभा के अंतर्गत बरेली तहसील के पास पूज्य गुरूजी वापोली वालों के साधना स्थल वापोली धाम के प्रख्यात संतश्री पूज्य लाल बाबाजी के सानिध्य में चल रही गौशाला की गाय माता एवं नंदी महाराज आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वयं सभी को बताया कि यह अद्भुत गाय माता और नंदी महाराज वापोली धाम से आए हैं और पूज्य लाल बाबाजी ने इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम में भेजा है।इस दौरान केन्द्रीय मंत्री ने कहा किसान भाइयों खेती में हम पशुपालन से कैसे आय बढ़ा सकते हैं यह यहाँ कृषि मेला में बताया जा रहा है।

-ऐसे हैं पूज्य लाल बाबाजी- पन्द्रह साल -वापोली धाम, गोसेवा और नशा मुक्ति अभियान

वापोली धाम भगवान भोलेनाथ का अति प्राचीन धाम है। यहां नील प्रस्तर के शिव जी विराजमान हैं। पूज्य गुरुजी वापोली वालों की साधना स्थली भी है यह धाम। यहीं पर पूज्य तपस्वी संत जम्मू वाले गुरूजी लाल बाबाजी को ईश्वर की कृपा से विश्व कल्याण के लिए साधना करने की प्रेरणा मिली। पूज्य तपस्वी संत लाल बाबाजी ने साल 2010 में संकल्प लिया कि अब बारह साल तक वापोली आश्रम से बाहर ही नहीं निकलेंगे और विश्व कल्याण के लिए केवल शिव और शक्ति की आराधना करते हुए गो सेवा और संत सेवा करेंगे। साथ ही नशा मुक्ति के लिए समाज को प्रेरित भी करेंगे। पूज्य तपस्वी संतश्री के इस पवित्र संकल्प को पन्द्रह बर्ष से अधिक हो गए। उल्लेखनीय है कि पूज्य महाराज श्री पन्द्रह वर्षों में आश्रम से बाहर निकले बिना ही ऐतिहासिक धार्मिक समारोहों का आयोजन किया, जिसमें वापोली धाम से मां नर्मदा जी के पवित्र तट मांगरोल तक की अद्भुत शोभायात्रा को आज नागरिकों के जहन में है।अद्भुत हैं लाल बाबाजी- गायों को रखते हैं एसी में, खुद रहे वटवृक्ष के नीचे और अब गौशाला में ही जमा दी आसन जिले के प्रसिद्ध वापोली धाम में गोसेवा की अनोखी मिसाल देखने को मिलती है। न कोई दिखावा और न ही कोई प्रचार-प्रसार, किंतु यहां पर गोमाता के ठाठ ही निराले हैं। यहां संपूर्ण गोवंश को एसी की सुविधा के साथ हर आधुनिक सुविधा मुहैया है। यह भी विचित्र है कि जहां गोवंश संपूर्ण सुविधा युक्त माहौल में ठाठ से रहता है। वहीं गाय माता को सभी सुविधाएं देने वाले विख्यात तपस्वी संत जम्मू वाले गुरुजी लाल बाबाजी स्वयं कई बर्षो तक वटवृक्ष के नीचे बनी साधारण कुटिया में रहे हैं।

गोवंश ही खेती का आधार

संत लाल बाबा जैविक खेती पर जोर देते हैं और गोशाला को साफ सुथरा रखते हैं। महाराजश्री खेती को रासायनिक प्रभावों से बचाने के लिए आसपास के किसानों को गोबर का खाद मुफ्त देते हैं। लाल बाबाजी कहते हैं कि गोवंश ही खेती का आधार है। अगर गोवंश को नहीं बचा सके तो फिर खेती को कैसे बचाया जा सकेगा।

समानता का भाव सभी गौवंश का सम्मान

वापोली धाम की गोशाला में सभी गोवंश को समान सुविधाएं प्राप्त है। यहां दुधारू गाय हो या अन्य गोवंश हो या बुजुर्ग गोवंश ही क्यों न हो, दाना पानी सभी को बरावर दिया जाता है। यहां देसी नस्ल के साथ ही कई प्रांतों की गायें भी हैं। लाल बाबाजी कहते हैं- गोसेवा तो कर्म में शामिल हो, खुद करते हैं सेवा वैसे तो वापोली धाम में गोसेवा की परंपरा दशकों पुरानी है। ज्ञान, कर्म और भक्ति की त्रिवेणी कहे जाने वाले सिद्ध संत गुरुजी वापोली वालों के समय से ही यहां गोसेवा होती आ रही है। उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जम्मू वाले लाल बाबाजी ने। संतश्री लाल बाबाजी का कहना है कि गोमाता के विना जीवन ही नीरस है। वे कहते हैं कि सेवा में किसी भी प्रकार का दिखावा नहीं होना चाहिए। गोसेवा तो कर्म में शामिल होना चाहिए।

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