उज्जैन, भोपाल, पन्ना समेत कई शहरों में मनेगा श्रीकृष्ण पर्व, 500 कलाकार देगें श्रीकृष्ण लीलाओं की भव्य प्रस्तुति

मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए श्रीकृष्ण पर्व का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 14 अगस्त से 18 अगस्त 2025 तक विभिन्न स्थानों पर होगा। इस दौरान, प्रदेश के प्रमुख मंदिरों, विशेष रूप से उज्जैन और भोपाल में भगवान श्रीकृष्ण और उनके जीवन से जुड़ी लीलाओं का मंचन किया जाएगा। यह कार्यक्रम धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से प्रदेश को संगीतमय और रंगीन बना देगा।

भगवान श्रीकृष्ण और मध्यप्रदेश का संबंध

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन और ज्ञान मध्यप्रदेश से गहरा जुड़ा हुआ है। श्रीकृष्ण ने उज्जैन में गुरु सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त की थी। इस प्रदेश में उनकी शिक्षा और उपदेशों का गहरा प्रभाव रहा है। इसलिए, श्रीकृष्ण के जीवन के हर पहलू को सामने लाते हुए, मध्यप्रदेश सरकार द्वारा इस आयोजन का उद्देश्य श्रीकृष्ण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है।

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बलराम जयंती और श्रीकृष्ण जयंती पर आयोजन

14 अगस्त 2025 (बलराम जयंती) और 16 अगस्त 2025 (श्रीकृष्ण जयंती) के अवसर पर श्रीकृष्ण पर्व का आयोजन विभिन्न स्थानों पर किया जाएगा। इस कार्यक्रम के दौरान, कलाकार श्रीकृष्ण के जीवन की घटनाओं को भव्य रूप से प्रदर्शित करेंगे। नृत्य नाटिका, भक्ति गायन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भक्तों को श्रीकृष्ण के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराया जाएगा।

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प्रमुख स्थानों पर कार्यक्रम

इस आयोजन में मुख्य रूप से उज्जैन, भोपाल, पन्ना, दमोह, जबलपुर, सागर, इंदौर, और अन्य प्रमुख शहरों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में शामिल होंगे:

  • श्रीकृष्ण नृत्य नाटिका
  • भक्ति गायन
  • मटकी फोड़ प्रतियोगिता
  • लोकनृत्य एवं रासलीला

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प्रमुख कलाकारों की प्रस्तुति

इस कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न कलाकार श्रीकृष्ण की लीलाओं की नृत्य-नाटिकाओं और भक्ति गायन की प्रस्तुतियां देंगे। इन प्रस्तुतियों में प्रमुख कलाकारों की सूची निम्नलिखित है:

  • अनुपम वानखेड़े (इंदौर) – बांसुरी वादन
  • संगीता शर्मा (दिल्ली) – श्रीकृष्ण नृत्य नाटिका
  • श्रद्धा जैन (दिल्ली) – भक्ति गायन
  • अविनाश धुर्वे (बैतूल) – ठाठ्या लोकनृत्य
  • मायूर तिवारी (वृंदावन) – चरखुला नृत्य

श्रीकृष्ण पर्व का सांस्कृतिक प्रभाव

इस पर्व के माध्यम से न केवल धार्मिक वातावरण बनेगा, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को भी बढ़ावा मिलेगा। श्रीकृष्ण के जीवन की लीलाओं के साथ, लोक कला, नृत्य, संगीत, और भक्ति गीतों का संगम भक्तों के मन को शांत और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करेगा।

कार्यक्रम की विशेषताएं

नृत्य नाटिका के माध्यम से श्रीकृष्ण की लीलाओं का जीवंत चित्रण।
भक्ति गायन से भव्य आयोजन।
मटकी फोड़ प्रतियोगिता*: श्रीकृष्ण जयंती पर पारंपरिक खेल।
लोकनृत्य* और *रासलीला*: कृष्ण के साथ रास रचाने का पारंपरिक तरीका।

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