आर्थिक संकट से जूझ रहीं ज्ञानबाई आजीविका मिशन की मदद से बनी आत्मर्भिर

किराना दुकान से आर्थिक समृद्धि की अग्रसर हुई श्रीमती ज्ञान बाई

सिटी बीट न्यूज नेटवर्क ​रायसेन 
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार द्वारा आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर स्वरोजगार के अवसर और राशि उपलब्ध कराई जा रही है, जिसका लाभ पाकर आज अनेक महिलाएं सफल उद्यमी हैं और परिवार की आर्थिक उन्नति में योगदान दे रही हैं। रायसेन जिले के सिलवानी विकासखण्ड के ग्राम खमरिया मानपुर निवासी श्रीमती ज्ञान बाई भी उन लाखों महिलाओं में शामिल हैं जिन्होंने स्व-सहायता समूह से जुड़ने के अपनी मेहनत और लगन से परिवार की आर्थिक स्थिति को बदला है।
सिलवानी तहसील मुख्यालय से 10 किमी दूर स्थित ग्राम खमरिया मानपुर में श्रीमती ज्ञान बाई अपने पति एवं एक बच्चे के साथ जीवन यापन करती थी। उनके पास दो एकड़ जमीन थी तथा परिवार पूरी तरह कृषि पर निर्भर था। सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं होने से खेती में उत्पादन कम ही होता था। पानी के अभाव में मिट्टी की गुणवत्ता भी कम होने लगी और कृषि योग्य भूमि बंजर भूमि में बदलने लगी। प्रकृति की मार व आर्थिक समस्याओं से जूझती श्रीमती ज्ञान बाई और उनके परिवार को पूर्णतः खेती पर आधारित होने के कारण अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। कृषि भूमि से साल भर में लगभग 35 हजार रू की आय ही होती थी जिससे उनको परिवार को चलाने व मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करने में बहुत समस्याओं का सामना करना पडता था।
ऐसे कठिन समय में श्रीमती ज्ञान बाई के जीवन में आजीविका मिशन आशा की किरण बनकर आया। श्रीमति ज्ञान बाई ने समूह व आजीविका मिशन की अवधारणा को समझने के बाद ग्राम में कृष्णा स्व-सहायता समूह का गठन किया और उसमें 10 सदस्यों को सम्मलित किया। समूह को चक्रिय राशि 20 हजार रूपये प्राप्त हुई। इससे समूह की बचत से रूपये लेकर आंतरिक लेन-देन करने लगीं। ज्ञान बाई के समूह ने समूह की दीदियों से चर्चा की और बैंक ऋण के लिए आवेदन तैयार किया, जिससे उनके समूह को बैंक लिंकेज के माध्यम से राशि प्राप्त हुई जिसका उपयोग सभी ने आजीविका गतिविधियों को बढ़ने के लिए किया।
श्रीमती ज्ञान बाई ने आजीविका बढ़ाने के लिए अलग सोचा और ज्ञान बाई ने समूह से ऋण लेकर कृषि कार्य और अपनी मुख्य आजीविका गतिविधि किराना दुकान को बढ़ाया जिससे वर्तमान में उनकी वार्षिक आय लगभग 2 लाख प्रतिवर्ष है। श्रीमती ज्ञान बाई बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के लिए बाद उनके जीवन में बहुत बदलाव आया है। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी है और समाज में मान-सम्मान भी बढ़ा है।
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