रेत से भरपूर नर्मदांचल के लोग ही रेत के लिए परेशान, लोकल रेत चोरों की गतिविधियों से बढ़ी किल्लत, सतरावन में विवाद—छह पर केस

सिटी बीट न्यूज नेटवर्क बरेली ( रायसेन )

नर्मदा नदी से घिरे बाड़ी, बरेली, उदयपुरा, देवरी, गाडरवारा और पिपरिया क्षेत्र को नर्मदांचल कहा जाता है। यहां नर्मदा के कई तट होने के बावजूद आम लोगों को रेत आसानी से नहीं मिल पा रही। कारण—स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों द्वारा वैध खदानों से कई जगहों पर चोरी-छुपे रेत भरने की गतिविधियां, है जिससे बाजार में रेत की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।

क्षेत्र में लगभग 56 वैध रेत खदानें दर्ज हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर स्थानीय लोग निर्धारित रॉयल्टी क्षेत्रों से हटकर मशीनों की मदद से रेत भर रहे हैं और ट्रॉलियां निकाल रहे हैं। कई मामलों में रेत एक स्थान से उठाई जाती है और रॉयल्टी किसी दूसरे स्थान की लगाई जाती है, जिसके चलते खनन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मोतलसिर क्षेत्र में खदान से रेत उठाकर गोरा बिसेर की रॉयल्टी लगाने और सांडिया पुल के आसपास होने वाले खनन को कोटपार महंत खदान की रॉयल्टी में दर्शाने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। इससे न केवल क्षेत्र में अवैध खनन व्यवस्था बन रही है, बल्कि रेत की उपलब्धता भी प्रभावित हो रही है।

बाहरी मांग बढ़ी, दाम में 3 गुना उछाल—स्थानीय जनता परेशान

पिछले एक दशक में रेत के दामों में भारी बढ़ोतरी हुई है। पहले 150–200 घन फीट की ट्रॉली रेत 1500–2000 रुपये में आसानी से मिल जाती थी। अब वही ट्रॉली 6000 से 8000 रुपये में मिल रही है। इंदौर, भोपाल, जबलपुर जैसे बड़े महानगरों में रेत की ऊंची कीमत मिलने के कारण क्षेत्र से बड़े पैमाने पर 10-चक्का डंपर और हाइवा के जरिए रेत भेजी जा रही है। सड़क निर्माण कंपनियां भी सीधे बड़े ऑर्डर दे रही हैं, जिससे स्थानीय जरूरतों के लिए रेत की उपलब्धता कम पड़ने लगी है।

घर निर्माण कर रहे लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। बरेली निवासी होशियार राजपूत बताते हैं—

“मकान निर्माण कई बार रेत न मिलने से अटक गया। जो ट्रॉली मिलती है, वह भी 6000–7000 रुपये में मिलती है, वह भी तय समय पर उपलब्ध नहीं होती।”

सतराबन में रेत रास्ते को लेकर विवाद, मारपीट—छह पर केस

अवैध भराई और कालिया भरने के लिए लगाए जाने को लेकर शुक्रवार को ग्राम सतरावत में दो पक्ष आमने-सामने आ गए। ट्रॉलियों में मशीन से रेत भरने और आवागमन के मार्ग को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। मौके पर दर्जनों लोग जमा हो गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

सूचना मिलने पर पुलिस बल मौके पर पहुंचा और दोनों पक्षों को शांत कराया। बाद में सभी को थाने ले जाया गया।
फरियादी रजत ठाकुर की शिकायत पर तीन लोगों पर केस दर्ज किया गया, वहीं शिवकुमार ठाकुर की शिकायत पर दूसरे पक्ष के तीन लोगों के खिलाफ भी अपराध कायम किया गया है। पुलिस ने मामला BNS की धारा 315(2), 351(3), 296(3)(5) के तहत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

नर्मदा तटों से घिरे इस इलाके में रेत की कमी होना अपने आप में एक विडंबना है। बाहरी शहरों को बड़े पैमाने पर रेत भेजे जाने और स्थानीय स्तर पर अनियमित खनन गतिविधियों के चलते आम जनता को महंगी और मुश्किल से मिलने वाली रेत से जूझना पड़ रहा है।
सतराबन में हुआ विवाद इस बात का संकेत है कि यदि स्थिति पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो रेत को लेकर ऐसे संघर्ष आगे और बढ़ सकते हैं।

इनका कहना है – लगभग एक वर्ष पहले खदानों का सीमांकन करवाया गया था , फिलहाल में कहां से रेत उठा रहे हैं और कहां की रॉयल्टी दे रहे हैं पटवारी को भेज कर दोबारा सीमांकन कराएंगे ।

– रामजीलाल वर्मा ( तहसीलदार बरेली )

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