जैन समाज के समर्थन में कीर्ति स्तंभ की मांग, विधायक ने संभाली छवि सुधार की कमान

MP News : मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में राजनीति से जुड़ा एक असामान्य दृश्य हाल ही में देखने को मिला। उत्तर-मध्य विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक अभिलाष पांडे स्वयं कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और हाथ बांधकर ज्ञापन सौंपते दिखाई दिए। ज्ञापन का विषय था जैन समाज की ओर से आईएसबीटी कैंपस पर कीर्ति स्तंभ की स्थापना की मांग। इस पूरे घटनाक्रम ने सवाल खड़ा कर दिया कि एक सत्तारूढ़ दल का विधायक, जिसके एक पत्र लिखने से काम हो सकता है, वह कलेक्टर कार्यालय निवेदन की मुद्रा में क्यों खड़ा हुआ?

ज्ञापन के जरिए समाज को साधने की कोशिश 

विकास कार्यों के संदर्भ में विधायक की भूमिका आमतौर पर सिफारिश होती है। यदि किसी विशेष समाज या संगठन की मांग के अनुरूप कोई निर्माण कार्य नगर निगम या प्रशासन को करना होता है, तो विधायक एक पत्र जारी कर देते हैं।  मामला स्वीकृति की प्रक्रिया में चला जाता है। जबलपुर में आईएसबीटी कैंपस में कीर्ति स्तंभ की स्थापना के लिए साल 2024 में नगर निगम के द्वारा जमीन भी आवंटित कर दी गई है।  ऐसे में इस कीर्ति स्तंभ की स्थापना मात्रक औपचारिकता रह गई है जो विधायक के एक फोन कॉल पर भी पूरी हो सकती थी। जनवरी 2024 में जमीन आवंटन के बाद अब अप्रैल 2025 में विधायक अभिलाष पांडे द्वारा कलेक्टर दीपक सक्सेना के समक्ष व्यक्तिगत रूप से ज्ञापन सौंपना प्रशासनिक प्रक्रिया से अधिक एक राजनीतिक कदम प्रतीत हुआ, जिससे यह संकेत गया कि इसके पीछे कोई गहरी रणनीति छिपी है। 

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वायरल ऑडियो से हुए नुकसान के लिए डैमेज कंट्रोल

दरअसल बीते दिनों जबलपुर में एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें कथित तौर पर जैन समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। इस ऑडियो के वायरल होने के बाद जैन समाज सहित अन्य संगठनों में भी भारी आक्रोश देखा गया। यह खबर मीडिया में सुर्खियों में रही और बीजेपी नेताओं पर समाज विशेष के प्रति अनादर के भी आरोप लगे। हालांकि, इसके बाद बीजेपी ने दोनों आरोपी नेताओं को बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था, लेकिन इस ऑडियो की वजह से बीजेपी को क्षेत्र में असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा था। चूंकि उत्तर-मध्य विधानसभा क्षेत्र में जैन समाज एक प्रभावशाली और निर्णायक मतदाता वर्ग माना जाता है, इस वर्ग की नाराजगी पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक हो सकती थी। ऐसे में विधायक पांडे का यह ज्ञापन ‘डैमेज कंट्रोल’ की दिशा में उठाया गया एक सोचा-समझा कदम माना जा रहा है।

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समाज के बीच मजबूत संदेश देने की कोशिश

विधायक पांडे के साथ दिगंबर जैन समाज के कई प्रतिनिधि भी मौजूद थे। ज्ञापन सौंपते वक्त उनका हाथ बांधकर खड़े रहना यह दिखाने की कोशिश थी कि वे न सिर्फ जैन समाज की भावना को सम्मान दे रहे हैं, बल्कि स्वयं को उनके साथ खड़ा दिखाना भी चाहते हैं। यह दृश्य मीडिया में वायरल हुआ और सोशल मीडिया पर भी जमकर चर्चा का विषय बना।

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राजनीतिक समीकरणों का स्पष्ट संदेश

उत्तर-मध्य विधानसभा क्षेत्र में जैन समाज की उपस्थिति निर्णायक है। फिर चाहे वह पार्षद चुनाव हों या विधानसभा का महासंग्राम। जैन समाज की भूमिका हर बार महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में विधायक द्वारा स्वयं ज्ञापन देने जाना, उस वर्ग के बीच अपने पक्ष में एक मजबूत संदेश छोड़ने का प्रयास था। यह स्पष्ट संकेत देता है कि अब सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रियाओं से नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव के माध्यम से भी मतदाताओं को साधा जाएगा।

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धार्मिक आस्था या राजनीतिक प्रतीक?

विधायक के ज्ञापन में आईएसबीटी कैंपस पर एक भव्य कीर्ति स्तंभ की स्थापना की मांग की गई है। जैन समाज में कीर्ति स्तंभ धार्मिक गौरव और आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक माने जाते हैं। लेकिन जब यह मांग एक राजनीतिक संदर्भ में सामने आए, तब यह केवल धार्मिक संरचना न होकर एक राजनैतिक प्रतीक भी बन जाती है,एक ऐसा प्रतीक जो आगामी चुनावी समीकरणों को साधने की भूमिका निभा सकता है।

प्रशासन से पहले जनमत को साधना जरूरी

सत्तारूढ़ दल के विधायक के लिए किसी भी निर्माण कार्य को शुरू कराने में औपचारिकता की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन जब विधायक खुद ज्ञापन देने पहुंचते हैं, तो यह साधारण प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि एक राजनीतिक सिग्नल होता है। ज्ञापन के बहाने जनता के बीच पहुंचना, नाराज मतदाताओं को मनाना और सोशल मीडिया में सकारात्मक छवि बनाना, यही आज की राजनीति की नई दिशा बन गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ‘कीर्ति स्तंभ’ भविष्य में कितनी ‘कीर्ति’ अर्जित करता है। और यह कीर्ती व्यक्तिगत रूप से विधायक के लिए होगी या सामूहिक रूप से उनकी पार्टी के लिए।

 

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