‘कवि गज्जे भैया स्मृति में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आज

सिटी बीट न्यूज नेटवर्क बरेली

बरेली – क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक और राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के निर्देशन में प्रतिवर्ष की भांति मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग, साहित्य अकादमी द्वारा देश के प्रसिद्ध बुंदेली हास्य कवि, वरिष्ठ साहित्यकार, राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त शिक्षक स्व. प्रभुदयाल खरे गज्जे भैया की स्मृति में होने वाला अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आज नगर के दशहरा मैदान हॉकी ग्राउंड में संपन्न होगा। कार्यक्रम में राष्ट्रीय कवि सुमित मिश्रा”ओरछा”, पंकज पंडित ललितपुर, शंकर शहर्ष नरसिंहपुर, पंकज प्रसून मांडब, हीरामनी वैष्णव कोरबा, संदीप द्विवेदी भोपाल, आकांक्षा द्विवेदी फतेहपुर, द्वारा काव्य पाठ किया जाएगा । ज्ञात हो कि असम चुनाव में मंत्री पटेल की अहम भूमिका होने के कारण व्यस्तता के चलते उनके निर्देशन में कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संस्कृति,पर्यटन,धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी, जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा एवं विशेष अतिथि के रूप में मंत्री पटेल के प्रतिनिधि के रूप में अभिज्ञान नरेंद्र पटेल उपस्थित रहेंगे। कवि गज्जे भैया स्मृति मंच द्वारा कार्यक्रम की भव्य तैयारी की जा रही है। मंच के पदाधिकारियों ने अधिक से अधिक संख्या में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में पधारने की अपील की है।’

”मध्यप्रदेश के गौरव” राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त शिक्षाविद, वरिष्ठ साहित्यकार, बुंदेली हास्य कवि प्रभुदयाल खरे (गज्जे भैया) के बारे में बता रहे हैं। 22 मई, 1947 को नर्मदांचल के ग्राम मदनपुर, जिला नरसिंहपुर में जन्मे कवि प्रभुदयाल खरे गज्जे भैया के नाम से लोकप्रिय रहे थे, जिनकी साहित्य साधना बरेली, जिला रायसेन से प्रारंभ हुई। गज्जे भैया कवियों के शिल्पकार रहे है जिन्होंने बीते वर्षों सैकड़ों काव्य प्रतिभाओं को तरासा है, कवियों की तीन पीढ़ियों जैसे लब्ध प्रतिष्ठित से लेकर नवोदितों के बीच सेतु का कार्य किया है। नगर में लगातार 24 घंटे कवितापाठ “अखंड कवि सम्मेलन” कराकर काव्य जगत का इतिहास रचा, गज्जे भैया सादगीपूर्ण व्यवहार, कार्य कुशलता, एवं कर्तव्यनिष्ठा के साथ समर्पण भाव से साहित्य का कार्य करते रहे है, काव्य संसार में बुंदेली भाषा संग्रह “सैयां को बलुआ थाने में” दोहा संग्रह “दोहों के बीच गज्जे” हास्य कविताओं “हमे वोट दो” अलंकारों पर केंद्रित “यमक दमक” हाइकू विधा में”बिखरे सुमन” मुहावरों पर केंद्रित “तन उजला मन काला” डमरू छंद “लख यह भव” कहानी संग्रह “किताबें बोलती हैं” एवं चित्रगुप्त चालीसा का लेखन किया है। जीवन की विद्रूपताओं का बेबाकी से चित्रण तथा विविध विषय और संवाद शैली में प्रस्तुत उनके भाव, भाषा, प्रवाह और ओज का सम्मोहन कल्पना और यथार्थ में सामंजस्य स्थापित करता मिलता है। कविताओं में देश प्रेम, वर्तमान परिवेश का चित्रण,अंतर्मन की पीड़ा, लोकगीतों की मिठास, जीवन संघर्ष की आपाधापी, तीज त्योहार की मनोरम झांकी, समस्त ऋतुओं का बखान,सामयिक प्रसंग, बुंदेलखंड की माटी की सोंधी महक, नारी उत्थान, यात्रा संस्करण, हास्य व्यंग, राजनैतिक विसंगति और बाल रचनाओं के अनेकों अलग-अलग रंगों तथा अलग-अलग तेवरों के पुष्प छठा बिखरते हैं। साहित्य की उत्कृष्ट साधना हेतु संपूर्ण भारत से अनेकों संस्थाओं ने स्व गज्जे भैया का सम्मान किया है।

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