सिटी बीट न्यूज नेटवर्क बरेली
खैरी-मुगली स्थित खेड़ापति माता मंदिर परिसर में चल रहे सप्त दिवसीय अनुष्ठान के छठवें दिवस कथा-वाचिका देवी रत्नमणि द्विवेदी ने “भरत-चरित्र” पर प्रवचन किया। उन्होंने कहा—
“भरत का चरित्र त्याग, भ्रातृ-प्रेम और धर्मनिष्ठा का शिखर है। राज्य का अधिकार होने पर भी उन्होंने सिंहासन को ठुकराकर राम की चरण-पादुका को राज-सिंहासन पर स्थापित किया। यही निष्काम-सेवा और कर्तव्य-परायणता का आदर्श है।” देवी रत्नमणि ने भरत-राम मिलन, भरत-शत्रुघ्न संवाद और चित्रकूट-प्रसंग के मार्मिक उदाहरणों से सभा को भाव-विभोर कर दिया। श्रद्धालुओं ने “भरत जैसा भाई भगवान सबको दे”
के उद्घोष से परिसर गुंजायमान किया। आयोजक मण्डल ने सूचित किया कि कथा प्रतिदिन प्रातः 2 बजे से बजे 6 बजे तक होती है 12 अप्रैल को कथा बिश्राम पूर्णाहुति एवं भंडारे का आयोजन होगा ।







