फर्जीवाड़े में शामिल राइस मिलर्स दे रहे मिल बंद करने की धमकी

राइस मिलर्स पर 43 करोड़ के घोटाले की जांच के बाद 16 मिलर्स के खिलाफ FIR दर्ज हुई। अब मिलर्स संगठन प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

सोमवार को उन्होंने प्रेस वार्ता की, जिसमें उन्होंने खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश की। हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन के अध्यक्ष से लेकर सदस्य तक केवल हवा हवाई तर्क देते हुए नजर आए।

फर्जी ट्रकों से किया 43 करोड़ का खेल

जबलपुर जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए उपार्जित धान की मिलिंग में 43.02 करोड़ रूपये का भारी घोटाला सामने आया था। जांच में पाया गया कि 43 राइस मिलर्स ने कागजों में फर्जी ट्रकों के जरिए 1,87,026 क्विंटल धान का परिवहन दर्शाया, जो हकीकत में कभी हुआ ही नहीं।

प्रशासन की जांच में यह भी उजागर हुआ कि कुछ मामलों में ट्रक नंबर के स्थान पर कार, ऑटो या फर्जी रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों का उल्लेख किया गया। कुछ ट्रिप में ट्रकों से उनकी लोडिंग क्षमता से तीन गुना अधिक धान उठाने का रिकॉर्ड दर्शाया गया। इसके बाद सोलर 16 मिलर के खिलाफ कठोर धाराओं में FIR दर्ज की गई थी।

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11 लाख के एफडीआर का दिया  हवाला

मिल मालिकों ने आरोप लगाया कि हर मिलर के द्वारा 11 लाख रुपए का FDR शासन को जमानत के रूप में जमा किया जाता है और इस तरह जबलपुर जिले के मिल मालिकों कुल 48 करोड़ शासन के पास जमा है।

आगे उन्होंने यह भी बताया कि पूरे प्रदेश में लगभग 500 करोड़ रुपए मिल मालिकों का एफडीआर के तौर पर जमा है, लेकिन मिलिंग का काम लेने की शर्त के अनुसार जमा की गई जमानत राशि कैसे उन्हें घोटाला करने की छूट देती है यह समझाने का कोई भी तथ्य उनके पास मौजूद नहीं था।

कंप्यूटर ऑपरेटर्स के सर फोड़ा ठीकरा

राइस मिल मालिकों ने आरोप लगाया कि कंप्यूटर ऑपरेटर के पास उनकी आईडी होती है और ट्रकों के नंबर की एंट्री वह ही करते हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास आवक जावक की सभी पर्चियां सही नंबरों के साथ है। लेकिन शासन की जांच में आवक जावक की पर्चियों के साथ ही कांटा पर्चियां, गेट पास सहित कई ऐसे सबूत सामने आए हैं इसके बाद इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।

ऐसा नहीं है कि सरकार ने सिर्फ मिलर्स के ऊपर ही कार्यवाही की है। इस मामले में MPSCSC के जिला प्रबंधक सहित कंप्यूटर ऑपरेटरों को भी आरोपी बनाया गया है।

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डेटा और दस्तावेज थे कार्रवाई का आधार

प्रशासन की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया था कि जिन गाड़ियों के नंबर धान चालान में दर्ज किए गए, वे मास्टर डेटा में मिलर्स द्वारा ही फीड किए जाते हैं, न कि ऑपरेटर द्वारा।

इसके बावजूद कई मिलर्स ने गड़बड़ी की जिम्मेदारी केवल कंप्यूटर ऑपरेटरों पर डालने की कोशिश की। जांच में यह भी पाया गया कि कांटा पर्चियों में न तो पार्टी का नाम, न वस्तु का नाम दर्ज था, जिससे फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है।

सरकार को मिल बंद करने की धमकी

प्रेस वार्ता में मिलर्स ने प्रशासन पर यह भी आरोप लगाया कि अपने सिस्टम की खामियों को छुपाने के लिए उन्हें मोहरा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो सभी राइस मिलर्स को यह व्यापार छोड़ना पड़ेगा। प्रशासन इसे स्पष्ट दबाव बनाने की रणनीति मान रहा है । अधिकारियों का कहना है कि किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता और यदि किसी मिलर ने गड़बड़ी नहीं की है, तो उसे जांच से डरने की जरूरत नहीं।

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सिवनी का मामला भी आया चर्चा में

मिलर्स ने प्रेस वार्ता में यह भी कहा कि सिवनी जिले में भी इसी तरह की कार्रवाई हाईकोर्ट में टिक नहीं पाई थी। सिवनी में जिस मिल के खिलाफ कार्रवाई हुई थी, वह राइस मिलर संगठन का अध्यक्ष आशीष अग्रवाल था। उस पर भी ईओडब्ल्यू में एफआईआर दर्ज हुई थी। हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर राहत जरूर मिली, लेकिन मामला अभी विचाराधीन है।

कुल मिलाकर यह सामने आया कि यदि मिल मालिकों के पास दस्तावेज और सबूत हैं तो उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी चाहिए। मीडिया में अपनी छवि बचाने के लिए हवा हवाई आरोपों का फायदा तो इन मिल मालिकों को मिलता हुआ नजर नहीं आ रहा है।

फर्जीवाड़ा करने वाले मिलर्स के नाम सार्वजनिक

जांच और एफआईआर के दायरे में आए 43 मिलर्स में से जिन 16 के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ है, उनके नाम हैं-

अनिल सिंगला, राकेश शिवहरे, अंकित जैन, राजेश हेमराजानी, कमल कुमार जैन, आशीष हसवानी, प्रांजल केशरवानी, निधि पटेल, आनंद जैन, पारस जैन, रीता शिवहरे, मनोज सहजवानी, विनय कुमार, जितेन्द्र जग्गी, नीरज असाटी और सोनम साहू।

इसके अलावा MPSCSC के प्रभारी जिला प्रबंधक दिलीप किरार, विभिन्न इश्यू सेंटरों के प्रभारी व कंप्यूटर ऑपरेटरों सहित 28 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

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प्रशासन से भी हुई एक चूक

हालांकि प्रशासन की जांच व्यापक और ठोस दस्तावेजों पर आधारित रही है, लेकिन एक मामले में प्रशासन से भी त्रुटि हुई है। जांच में जिन 55 फर्जी ट्रकों से 258 ट्रिप लगाकर 72,720 क्विंटल धान का फर्जी परिवहन दर्शाया गया। इनमें से एक ट्रक नंबर MP22H0192  को प्रशासन ने फर्जी बताया था, लेकिन बाद में यह सामने आया कि यह वाहन वास्तविक रूप से अस्तित्व में है और मिल मालिकों द्वारा प्रस्तुत किया गया इकलौता प्रमाणिक नंबर है।

हालांकि, इस एक वाहन को छोड़कर अन्य 54 ट्रकों के संबंध में मिलर्स कोई वैध दस्तावेज, रजिस्ट्रेशन या परिवहन संबंधी तथ्य प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं। हालांकि इस एक ट्रक नंबर की जानकारी भी जबलपुर कलेक्टर को द सूत्र के द्वारा दे दी गई है और अब वह इसको संज्ञान में ले चुके हैं।

घोटालेबाज नहीं बचेंगे- प्रशासन की दो टूक

जबलपुर जिला प्रशासन का कहना है कि इस बार की कार्रवाई मजबूत डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है। एफआईआर में लगाए गए आरोप केवल अनुमानों पर नहीं, बल्कि पोर्टल लॉग डेटा, ट्रक नंबर वैरिफिकेशन, गेट पास, कांटा पर्चियों और जांच टीम के स्थल निरीक्षण पर आधारित हैं।कोई भी कितना बड़ा व्यापारी क्यों न हो, यदि दोषी पाया गया तो कानून के अनुसार कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

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