कांग्रेस नेता ने की RSS की तालिबान से तुलना, पीएम मोदी पर भी साधा निशाना

कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में आरएसएस की सराहना करने पर तीखी आलोचना की। हरिप्रसाद ने RSS की तालिबान से तुलना करते हुए कहा कि ‘भारतीय तालिबान’ कहना बिलकुल उचित है, क्योंकि उनका काम देश में शांति भंग करने का है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से अपने भाषण में आरएसएस के 100 वर्षों के योगदान को सराहा था, और इसे ‘दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ’ बताया था।

हरिप्रसाद का कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा आरएसएस की प्रशंसा की यह आलोचना न केवल राजनीतिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी खतरनाक है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या कभी कोई ‘संघी’ स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया था। उनका कहना था कि आरएसएस का स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं है और यह संगठन अंग्रेजों से ज्यादा स्वतंत्रता सेनानियों से नफरत करता था।

आरएसएस की फंडिंग पर सवाल

बीके हरिप्रसाद ने आरएसएस के फंडिंग स्रोत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आरएसएस एक पंजीकृत संगठन नहीं है, और यह एक बहुत बड़ा सवाल है कि उसे धन कहां से मिलता है। उनका आरोप था कि कोई भी एनजीओ जो देश में काम करना चाहता है, उसे संविधान के अनुसार पंजीकरण कराना चाहिए, लेकिन आरएसएस के मामले में यह स्पष्ट नहीं है कि उसे धन कहां से मिलता है।

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बीजेपी और आरएसएस पर आरोप

हरिप्रसाद ने बीजेपी और आरएसएस पर इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि भाजपा और आरएसएस लगातार इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वह अपने राजनीतिक फायदे के लिए पुराने घटनाक्रमों को बदल सकें। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि ब्रिटिश शासन के दौरान बंगाल के प्रधानमंत्री ए.के. फ़ज़लुल हक ने विभाजन का पहला प्रस्ताव पेश किया था और जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी उसी प्रस्ताव में शामिल थे।

पीएम मोदी का बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से अपने संबोधन में कहा था कि आरएसएस का 100 वर्षों का योगदान देश के लिए गौरवपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस का योगदान राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने इसे “दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ” कहा और इसके काम की सराहना की।

यह टिप्पणी प्रधानमंत्री की ओर से आरएसएस को दिया गया एक बड़ा सम्मान था, जिसे कांग्रेस नेता ने राजनीतिक दृष्टि से गलत और एकतरफा बताया।

बयान पर भाजपा का जवाब

कांग्रेस नेता के इस बयान के बाद भाजपा ने त्वरित प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेताओं ने बीके हरिप्रसाद के बयान को अव्यावहारिक और गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आरएसएस के योगदान को स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि यह संगठन देश की सेवा में पूरी ईमानदारी से काम करता रहा है।

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इतिहास को फिर लिखने पर विवाद

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह दावा किया कि आरएसएस ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कभी कोई भूमिका नहीं निभाई और उसे स्वतंत्रता सेनानियों से नफरत थी। भाजपा और आरएसएस द्वारा इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने के आरोपों का यह मुद्दा राजनीतिक मंच पर तीखा हो गया है।

क्या हैं प्रमुख विवाद?

  1. हरिप्रसाद का आरोप था कि आरएसएस का स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं था।
  2. आरएसएस की फंडिंग के स्रोत पर सवाल उठाए गए।
  3. भाजपा और आरएसएस पर इतिहास को तोड़ने और बदलने का आरोप।
  4. प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आरएसएस की सराहना पर कांग्रेस नेता की आलोचना।

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