इंदौर MYH में चूहों के कुतरने से दो नवजात की मौत पर डीन, अधीक्षक के झूठ, CM बोले- दोषियों को छोड़ेंगे नहीं

इंदौर के एमवाय अस्पताल में नवजात बच्चों के चूहों द्वारा कुतरे जाने और उनकी मौत होने के बाद अब राजनीति शुरू हो गई है। पहले बच्चे की तो मौत एक दिन पहले ही हो गई थी। दूसरे बच्चे ने भी इलाज के दौरान सिस्टम के आगे अपने घुटने टेक दिए और इस दुनिया से विदाई ले ली।

पहले बच्चे ने दम तोड़ा तो डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बेशरम हंसी के साथ बताया कि हमने कंपनी पर जुर्माना लगाया है। वे यह सब कुछ इस तरह से बता रहे थे जैसे कि अपनी उपलब्धियां गिना रहे हों। दूसरे दिन एक और नया ड्रामा शुरू हो गया, जिसमें अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके काफी बारीकी से यह बताया कि बच्चे को पहले से ही बीमारियां थीं। इधर, इंदौर एयरपोर्ट पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने घटना पर खासी नाराजगी व्यक्त की और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही। 

जिम्मेदारों ने माना कि बच्चे गंभीर थे, फिर भी लापरवाही बरती

एमवाय अस्पताल अधीक्षक ने दूसरे बच्चे की मौत के बाद जिस तरह से बयान दिए उससे साफ तौर पर पता चल रहा है कि यह पूरी तरह से मेडिकल निगलीजेंसी है। खास तौर से वे बच्चे जिनका हीमोग्लोबिन कम था। उनकी इंटेस्टाइन नहीं थी। जिनको उनके माता–पिता छोड़कर चले गए थे। उसके लिए जहां अतिरिक्त सतर्कता और जिम्मेदारी से काम करने की जरूरत थी।

वहीं, पर उन नवजात बच्चों को चूहे वाले बाड़े (NICU) में रख दिया गया। कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, नवजातों के प्रति अस्पताल प्रबंधन का इस तरह का कृत्य गैर–इरादतन हत्या की श्रेंणी में आता है।

अधीक्षक बोले, हां बच्चों को चूहों ने कुतरा

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया और एमवाय अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक यादव यह तो मान रहे हैं कि जिन दोनों बच्चों की मौत हुई है उन्हें चूहों ने कुतरा था, लेकिन इस बात से सरासर इनकार कर रहे हैं कि उसी कारण से वे मरे हैं।

खास बात तो यह है कि वे दोनों ही इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि बच्चों में इन्फेक्शन भी मिला है, लेकिन यह स्वीकार नहीं कर रहे हैं कि यह इन्फेक्शन चूहों के द्वारा कुतरे जाने से हुआ होगा। जबकि चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक जिस तरह का इन्फेक्शन बच्चों में मिला है वह चूहों के मल–मूत्र से भी हो सकता है।

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इस तरह से घूम रहे थे चूहे

इन पर हुई कार्रवाई

डॉ. ब्रजेश लाहोटी विभागाध्यक्ष, पीडीयाट्रिक सर्जरी विभाग को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

डॉ. मुकेश जायसवाल, सहायक अधीक्षक एवं भवन प्रभारी को निलंबित किया गया।

मारग्रेट जोजफ, नर्सिंग सुपरिटेंडेंट को हटाया।

आकांक्षी बेंजामिन, नर्सिंग ऑफिसर को सस्पेंड किया।

श्वेता चौहान नर्सिंग ऑफिसर को सस्पेंड किया।

कलावती बलावी सहायक प्रभारी नर्सिंग ऑफिसर (NICU) को शोकाज नोटिस दिया।

प्रवीणा सिंह प्रभारी नर्सिंग ऑफिसर (PICU) को निलंबित किया गया।

डॉ. मनोज जोशी प्रभारी व प्राध्यापक (पीडियाट्रिक सर्जिकल) को शोकाज नोटिस दिया।

एजाइल कंपनी पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया।

विधायक और कलेक्टर पहुंचे अस्पताल

कलेक्टर आशीष सिंह और विधायक गोलू शुक्ला बुधवार को एमवाय अस्पताल पहुंचे। यहां पर उन्होंने ना केवल एनआईसीयू वार्ड का निरीक्षण किया, बल्कि अस्पताल प्रबंधन से घटना के संबंध में चर्चा भी की। कलेक्टर सिंह ने इस दौरान कहा कि बच्चों को चूहों द्वारा कुतरे जाने की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। इसमें दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। 

शासन ने भी संज्ञान लेकर की कार्रवाई

कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि जो घटना विगत दिवस हुई थी और उसका एक वीडियो भी सामने आया था। जो कि बच्चों को चूहों द्वारा काटे जाने का था। वह दुर्भग्यपूर्ण घटना थी। उसके संबंध में अस्पताल प्रबंधन और विभाग द्वारा कार्रवाई भी की गई थी। जिसमें दो लोगों को सस्पैंड किया गया था और कुछ लोगों को शोकाज नोटिस भी दिया गया है। शासन की तरफ से भी जिम्मेदार लोगों को नोटिस दिया गया है। निश्चित रुप से ऐसी चीज नहीं होनी चाहिए थी। इसमें जो एजेंसी है या कोई और भी अलग जांच में दोषी पाया जाता है तो कड़ी कार्रवाई उसमें की जाएगी।

मौत पर उठे सवाल, डीन ने दी सफाई

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि मृतक नवजात का वजन मात्र 1.2 किलो था, हीमोग्लोबिन बेहद कम था और जन्म से ही कई जटिलताएँ थीं। उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। डीन ने स्पष्ट किया कि “चूहे के काटने का घाव बहुत छोटा था, मौत का कारण सेप्टिसीमिया (इन्फेक्शन) और जन्मजात समस्याएँ हैं। डीन ने कहा कि चूहों की सक्रियता की जानकारी समय पर न देने और सतर्कता में चूक के चलते कंपनी व स्टाफ पर कार्रवाई की गई। 

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अस्पताल अधीक्षक बोले, 5 साल से पेस्ट कंट्रोल नहीं हुआ

इस संबंध में सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव ने कहा अस्पताल में पांच साल पहले बड़ा पेस्ट कंट्रोल कराया गया था। उसके बाद अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। मरीजों के परिजन अक्सर खाद्य सामग्री वार्ड तक ले आते हैं, जिसकी वजह से चूहों की संख्या बढ़ गई है। इस पर जल्द ही नियंत्रण के उपाय किए जाएंगे। दोनों बच्चों की मौत का कारण चूहों द्वारा कुतरा जाना नहीं है। एक बच्चा बेबी ऑफ मंजू 3 दिन का था। वह देवास से रैफर होकर आया था। उसके परिजन बच्चे को मरा हुआ समझकर छोड़कर चले गए थे। वहीं, दूसरा बच्चा 12 दिन का बच्चा था। वह अज्ञात है, क्योंकि उसे भी परिजन छोड़कर चले गए थे। दोनों को जन्मजात कई तरह की बीमारियां थीं।

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