हरि ज्योति परंपरा, अद्भुत लोक धरोहर इसे सहेजने की जरूरत हरियाली अमावस्या पर गांवों में सजी हरि ज्योति की शुभ परंपरा गाय के गोबर से दीवारों पर उकेरे चित्र…

बरेली (रायसेन) 24 जुलाई 2025
कमल याज्ञवल्क्य

रायसेन जिले सहित मालवा-नर्मदा अंचल के गांवों में गुरूवार को हरियाली अमावस्या पर पारंपरिक उल्लास देखा गया। इस अंचल के नागरिकों में यह दिन ‘हरि ज्योति ’ या हरियाली अमावस्या के नाम से प्रसिद्ध है। श्रावण महीने की अमावस्या का यह पर्व जहां वर्षा ऋतु की समृद्धि का प्रतीक है, वहीं लोक आस्था और पर्यावरण चेतना से भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि हर ओर हरियाली ही हरियाली होती है।

यह है लोकपरंपरा

हरियाली अमावस्या के दिन गांवों में ग्रामीण जन अपने घरों में दालानों के द्वार के दोनों ओर गाय के गोबर से ‘हरि ज्योति’ के लिखना बनाते हैं। पारंपरिक रूप से यह विशेष चित्र या लेखन गाय के पवित्र गोबर से तैयार किया जाता है, जिसमें हरि (भगवान विष्णु), लक्ष्मी, और शुभता का आह्वान होता है। इसे दीवार पर हाथों से बनाए जाने की परंपरा है। और इसमें पत्तियों, बेल-बूटों, दीप या श्री अंक आदि का संयोजन किया जाता है। यह पारंपरिक होते हैं। हालांकि चित्रों में कहीं कहीं थोड़ी बहुत भिन्नता हो सकती है, किन्तु भाव एक ही पारंपरिक रहता है।

महिलाएं पहले करतीं हैं घर की शुद्धता

गांवों में महिलाएं हरियाली अमावस्या के दिन स्नान कर साफ-सुथरे कपड़ों में घर की लिपाई गाय के हरे गोबर से करतीं हैं, द्वार सजाती हैं, और कहीं-कहीं तुलसी चौरा या गोशाला में भी यह हरि लेखन किया जाता है। यह परंपरा न केवल धार्मिक विश्वास है, बल्कि गोबर की जैविक उपयोगिता और स्थानीय कलात्मकता का भी सुंदर उदाहरण है। यह गाय के धार्मिक महत्व को भी बताता है।

बेटियां आतीं हैं मायके

गांवों में ऐसी परंपरा है कि इस पर्व पर नव विवाहित बेटियों को मायके बुला लिया जाता है। इस अंचल में नवविवाहिताएं पहली बार मायके आती हैं और बहनों को उपहार भेजे जाते हैं। इसके पीछे यह भी मानना होता है कि पन्द्रह दिन बाद रक्षाबंधन का पर्व भी आता है और ऐसे में बेटी कुछ दिन मायके में रहेगी तो उत्सव जैसा माहौल भी रहता है। यहाँ सभी सहेलियों का मिलना भी हो जाता है। गांव में मानदानों को निमंत्रण करके भोजन भी कराया जाता है।

यह है धार्मिक महत्व

हरियाली अमावस्या का धार्मिक दृष्टि से भी काफी महत्व है। माना जाता है कि शिव जी का प्रिय सावन माह की हरियाली अमावस्या श्रीहरि विष्णु, श्रीकृष्ण एवं प्रकृति की आराधना का अवसर भी होता है। कई स्थानों पर पूजा की अलग अलग पद्धति भी है।

अद्भुत लोक धरोहर

कुल मिलाकर हरियाली अमावस्या की यह ‘हरि ज्योति परंपरा’ एक अद्भुत लोकधरोहर है, जिसे सहेजने और अगली पीढ़ी को सौंपने की आवश्यकता है, ताकि यह लोक परंपरा का प्रकृति और पर्यावरण के साथ इसके धार्मिक महत्व बना रहे। यही वह समय भी होता है जबकि खेतों में हरियाली देखकर कृषक उत्साह से भर उठते हैं। सभी के अनुकूल माना जाता है यह समय।

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