छत्तीसगढ़ की सहमति में उलझा 4.50 लाख पेंशनर्स की मंहगाई राहत की राशि

BHOPAL. लकीर के फकीर अधिकारियों की आदत आमजन के सामने ही मुश्किल खड़ी नहीं करती बल्कि कर्मचारियों की भी उलझन बनती है। ऐसी ही स्थिति का शिकार प्रदेश के 4.50 लाख सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। इन कर्मचारियों को मंहगाई भत्ते का नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक साल उन्हें 18 से 84 हजार रुपए तक का नुकसान हुआ है।

ये नुकसान मध्यप्रदेश से अलग छत्तीसगढ़ के गठन के दौरान बने एक नियम की वजह से हो रहा है। नियम में पेचीदगी नहीं है लेकिन शासन के शीर्षस्थ अधिकारियों की की बेरुखी ने इसे उलझाकर रखा है। दोनों राज्यों के बीच मंहगाई राहत बढ़ाने के लिए मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों के बीच आपसी सहमति से तय करने का प्रावधान है।

मध्यप्रदेश के पेंशनरों को बढ़ा हुआ मंहगाई राहत देने से पहले छत्तीसगढ़ की सहमति लेनी थी लेकिन इसमें महीनों बीत गए। शासन के अधिकारियों की अरुचि की वजह से छत्तीसगढ़ राज्य की सहमति का मसला उलझा रहा। अब सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने हिस्से की राशि मांग रहे हैं और सरकार इस पर चुप्पी साधे बैठी है।

ये सेवानिवृत्त कर्मचारी डेढ़ दशक से सरकार से अपने हक का मंहगाई राहत दिलाते हुए नुकसान की भरपाई की मांग कर रहे हैं। उधर सरकार लगातार उम्रदराज सेवानिवृत्त कर्मचारियों की लाचारी को नजरअंदाज करती आ रही है।

अब सरकार की बेरुखी के चलते पेंशनरों ने हाईकोर्ट की शरण ली है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को फरवरी 2024 से सातवे वेतन आयोग के तहत 50 प्रतिशत मंहगाई भत्ता दिया जा रहा। इसमें जुलाई 2024 से 53 प्रतिशत कर दिया गया और 1 जनवरी से इसे 2 प्रतिशत बढ़ाकर 55 फीसदी कर दिया गया है। लेकिन जनवरी से जुलाई के बीच सात माह गुजरने के बाद भी पेंशनरों का मंहगाई राहत नहीं बढ़ाई गई है।

मध्यप्रदेश सरकार इसके संबंध में छत्तीसगढ़ से अब तक सहमति ही नहीं ले सकी है। इस वजह से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को हर महीने डेढ़ से सात हजार रुपए और साल में 18 से 84 हजार रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है>

सामंजस्य के प्रावधान का रोड़ा

एक नवंबर 2000 को अलग छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के समय मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच प्रशासनिक ढांचे, सरकारी कर्मचारियों के बंटवारे और उन्हें दी जाने वाली सुविधाओं के निर्धारण के लिए नियमावली बनाई गई थी। इसी के निर्धारण के लिए धारा 49 (6) भी अस्तित्व में आई। इसके तहत दोनों राज्यों को नीतिगत मामले लागू करने से पहले आपसी सहमति लेने का प्रावधान किया गया था। 

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पल्ला झाड़ रहे हैं जिम्मेदार

जिस प्रावधान को दोनों राज्यों में सामंजस्य के लिए बनाया गया था अब उसी के बहाने अफसरशाही अपनी कमियां छिपा रही है। लकीर के फकीर बने अधिकारी अपनी अरुचि और सहमति के लिए चर्चा न करने की गलती पर पल्ला झाड़ रहे हैं।  केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को मूल सूचकांक के आधार पर साल में दो बार जनवरी और जुलाई माह में भत्तों और एरियर्स का पुर्ननिर्धारण करती है। वहीं राज्य के कर्मचारियों और पेंशनर्स को डीए और डीआर दिया जाता है। मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को केंद्र के समान डीए का लाभ दिया जा रहा है, लेकिन सेवानिवृत्त कर्मचारी इससे वंचित हैं।

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क्या है धारा 49 (6) की उलझन

मप्र के साढ़े 4 लाख और छत्तीसगढ़ के करीब 5 हजार कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 (6) बनाई गई थी। इसमें स्पष्ट था कि प्रदेश में रिटायर कर्मचारियों को पेंशनर्स के डीआर में बढ़ोतरी करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार को छत्तीसगढ़ से अनुमति लेनी होगी। नवंबर 2000 से पहले के पेंशनर्स की जिम्मेदारी को दोनों राज्यों के बीच जनसंख्या के अनुपात में बांटा गया था। इसमें एमपी की हिस्सेदारी 73.38 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ की 26.62 प्रतिशत तय हुई थी। हालांकि इसमें स्पष्ट था कि दोनों राज्यों के पेंशनर्स को बिना किसी रुकावट के भुगतान मिलता रहेगा।

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पूर्व सीएस ने बिगाड़ा ढर्रा

कर्मचारी नेता और पेंशनर अनिल बाजपेई ने बताया कि साल 2005 तक मध्य प्रदेश में रिटायरमेंट कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए धारा 49 (6) का जिक्र तक नहीं किया गया। सबको बराबर मंहगाई भत्ता में बढ़ोतरी का लाभ मिलता रहा, लेकिन साल 2006 में तत्कालीन मुख्य सचिव एपी श्रीवास्तव ने मध्य प्रदेश में पेंशनर्स को महंगाई राहत देने के लिए छत्तीसगढ़ से सहमति लेने पर जोर देना शुरू किया।

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कोर्ट के सहारे हक की लड़ाई 

मध्य प्रदेश पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई है। इसमें प्रदेश के साढ़े 4 लाख पेंशनर्स को महंगाई राहत देने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य से सहमति लेने की प्रक्रिया को दोनों राज्यों के सरकारों को जारी किया नोटिस चुनौती दी गई है। इस मामले में हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय, केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सामान्य प्रशासन विभाग व वित्त विभागों को नोटिस जारी किया है। साथ ही पूछा है कि मध्य प्रदेश में महंगाई राहत देने के लिए छत्तीसगढ़ से सहमति क्यों ली जा रही है।

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