कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद पर धोखाधड़ी का केस दर्ज, हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई

मध्यप्रदेश के भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। उनपर आरोप लगा है कि उन्होंने अपने कॉलेज की मान्यता प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। यह कार्रवाई जबलपुर उच्च न्यायालय (HC) के आदेश पर की गई है। 

कोर्ट के निर्देश पर कार्रवाई 

हाल ही में उच्च शिक्षा विभाग ने इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज की मान्यता को रद्द कर दिया था। हालांकि, छात्रों के भविष्य को देखते हुए अदालत ने कॉलेज को बंद करने से रोक दिया, लेकिन नए छात्रों के लिए एडमिशन पर पूरी तरह से रोक लगा दी।

अदालत ने इस मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस कॉलेज का बिना राजनीतिक संरक्षण के इतने वर्षों तक संचालन संभव नहीं हो सकता था। यह मामला अब एक बड़े राजनीतिक और कानूनी विवाद में बदल गया है, और सभी की निगाहें अब इस पर हैं कि आगे क्या कार्रवाई होती है। 

कोहेफिजा थाने में दर्ज हुआ मामला 

जबलपुर हाईकोर्ट के निर्देश पर भोपाल के कोहेफिजा थाने में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद पर धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है; उन पर फर्जी दस्तावेजों की मदद से काॅलेज की मान्यता प्राप्त करने का आरोप है।

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कांग्रेस विधायक का कॉलेज और फर्जी दस्तावेज

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के स्वामित्व वाले कॉलेज, ‘अमन एजुकेशन’, पर आरोप है कि उन्होंने कॉलेज की मान्यता प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेज पेश किए थे। उच्च शिक्षा विभाग ने इस कॉलेज की अंतरिम मान्यता रद्द कर दी थी क्योंकि कॉलेज के द्वारा आवश्यक कागजात और शर्तों का पालन नहीं किया गया था।

इससे पहले कॉलेज को अस्थायी मान्यता दी गई थी, लेकिन बाद में विभाग ने पाया कि कॉलेज के दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ थी। इन दस्तावेजों में अधिकारियों से मिलीभगत का आरोप भी लगाया गया है, अब जबलपुर हाईकोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लिया और एक सख्त टिप्पणी करते हुए कांग्रेस विधायक पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

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धोखाधड़ी का मामला: भोपाल में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कॉलेज की मान्यता प्राप्त करने का आरोप है।

कोर्ट के निर्देश पर कार्रवाई: जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश पर आरिफ मसूद के कॉलेज के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।

कॉलेज की मान्यता रद्द: उच्च शिक्षा विभाग ने इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी, लेकिन छात्रों के हित में नए प्रवेशों पर रोक लगा दी है।

अदालत की टिप्पणी: हाईकोर्ट ने कहा कि बिना राजनीतिक संरक्षण के इस कॉलेज का इतने वर्षों तक संचालन संभव नहीं हो सकता था।

अधिकारी की मिलीभगत का आरोप: आरोप है कि कॉलेज के फर्जी दस्तावेजों में संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत भी थी, जिससे मान्यता प्राप्त की गई।

12 जून को रद्द हुई थी काॅलेज की मान्यता

कांग्रेस विधायक के इंदिरा प्रियदर्शिनी काॅलेज की जांच के बाद उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इसी वर्ष 12 जून को मान्यता निरस्त कर दी थी। विभाग के अधिकारियों का कहना था कि काॅलेज की मान्यता संबंधित जरूरी दस्तावेज नहीं पाए गए हैं। काॅलेज की जांच में कुछ अनियमितताएं भी मिली है। अब इस मामले मेें उच्च न्यायालय द्वारा काॅलेज संचालक कांग्रेस विधायक पर एफआईआर के निर्देश दिए है। 

क्या है कोर्ट की टिप्पणी

उच्च न्यायालय ने इस मामले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि इस कॉलेज का इतने वर्षों तक संचालन राजनीतिक संरक्षण के बिना नहीं हो सकता था। अदालत ने इसके बाद कॉलेज के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और नया प्रवेश रोक दिया। इस मामले के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि न्यायिक प्रक्रिया और विभागीय जांच में क्या परिणाम सामने आते हैं।

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