बरेली,जामगढ़, 27 जुलाई 2025 – जामगढ़ शिव गुफा पर उमड़ेगा शिवभक्तों का जनसैलाब,विंध्यांचल पर्वतमाला पर विराजे है भोलेनाथ

बरेली,जामगढ़, 27 जुलाई 2025
कमल याज्ञवल्क जामगढ़ बरेली

दुर्लभ जल धारायें, रहस्यमयी बाबड़ी, प्राकृतिक परिक्रमा मार्ग, गौ गुफा, गुत्वाकर्षण पर झूलती हुई विशाल चट्चान, तीज त्यौहारों पर शिवगुफा पर सुनाई पड़ती है अलौकिक ध्वनियां।

11 वी शताब्दी का पाषाण का शिव मंदिर हजारों वर्ष पुराने पद चिन्ह

शिलालेख, पाषाण की दुर्लभ सुन्दर मूर्तियां. महान संतो की तपोभूमि, ऐतिहासिक एवं पुरातत्वों के अवशेषों की धरोहर, त्रेता और द्वापर दो युगों की कहानी, शिव व शक्ति की क्रीड़ा स्थली।

यहां है एक हजार वर्ष पुराना देवी कामख्या का तांत्रिक मठ

यहां है देवी विंध्यवात्तनी का हरी-भरी वादियों में विध्यांचल की तलहटी में माता बराही का मंदिर, तीन विशाल प्राचीन सरोवर जामवंत जलप्रपात (वॉटरफाल)

यहां शिवभक्तों, पर्यटकों व सैलानियों का स्वागत करती है हरी-भरी वादियों में अटखेलियां करती अविरल जल धारायें जामवंत जलप्रपात एवं आसपास वर्षाजल से दूधिया हुई पहाड़ियां।

ऋषि मुनि साधकों की तप स्थली अवशेषों में धार्मिक इतिहास

भगवान श्री कृष्ण की ससुराल माता जामवंती की क्रीड़ा स्थली धरोहर के रूप में भगवान जामवंत की गुफा।

मनोहर विंध्यांचल पर्वतमाला की वादियों में अटखेलियां करती अविरल जल धारायें।

रायसेन जिले में बरेली तहसील से करीब 20 किमी. की दूरी पर बसा ग्राम जामगढ़ एवं पुरातत्व अवशेषों की धरोहर है, विंध्यांचल पर्वतमाला की तलहटी में स्थित ऋषि मुनियों और साधकों की तपस्थली रहा है, त्रेता और द्वापर दो युगों की साक्षी होने के साथ-साथ अपने प्राकृतिक सौंदर्य और शैलाश्रयों को समेटे गोरावान्वित है।

ग्राम जामगढ़ में प्राकृतिक शिवगुफा में विध्यांचल पर्वतमाला की तलहटी में शिवलिंग विराजमान है, ग्राम जामगढ़ के आसपास आदिमानव की आश्रय स्थली रही है। प्राकृतिक गुफाओं की विस्तृत श्रृंखला है, इन गुफाओं में से एक प्रमुख शिवगुफा है, जमीन से लगभग एक हजार फिट की ऊंचाई पर विंध्यांचल पर्वतमाला की पहाड़ी पर स्थित गुफा अंदर प्राकृतिक रूप से बनी हुई है, यहीं पर भगवान श्री भोलेनाथ की प्रतिमा स्थापित है. यहीं पर प्राकृतिक बावडी है जिसमें वर्ष भर जल भरा रहता है. यहां प्राकृतिक शिवलिंग की पत्थर की मूर्ति सजीव सी लगती है, यह मूर्ति शिवमाला के साथ पुरातत्व प्रमियों को भी आकर्षित करती है। यहां वर्ष भर यात्री शिव दर्शन को आते है। सोमवार व श्रावण मास में शिवभक्तों, सैलानियों एवं प्रकृति प्रेमियों का मेला लगता है, आसपास एवं दूर-दूर से भक्त यहां शिवदर्शन हेतु आते है, मन्नत मांगते है, मन्नत पूरी होने पर यहां भक्त प्रसादी लेकर पुनः पधारते है, सैलानियों और पर्यटकों का भी यहां मेला लगा रहता है पानी की प्राकृतिक बाबड़ी पहाड़ी से बरसात में भगवान शिव का प्राकृतिक अभिषेक कर रही अविरल जल धारायें गौ गुफा, चमत्कारी जल बूंदे जो वर्ष भर गिरती है, प्राकृतिक परिक्रमा मार्ग।

1. गौ गुफा

शिवालय के ठीक बगल में एक संकीर्ण गौ गुफा है जो प्राकृतिक क्षरण व भूकंपी हलचलों के चलते संकीर्ण हो गई है, गुफा के अंदर लम्बा चौडा मैदान है। यहां अनेक संत साधनारत् व समाधिस्त है। ऐसी किवदन्ती है यहां खड़े होने से मन को अपार शांति मिलती है।
2. 11 वी शताब्दी का पाषाण सुरई मंदिर –

रीछड़मल (श्री जामवंत जी) हाथ से निर्मित 11 वी सदी में पत्थरों से तरासा गया प्राचीन ऐतिहासिक पुरातत्वीन महत्व का प्राचीन शिवमंदिर भगदेही जामगढ़ में स्थित है। श्रावण मास एवं वर्ष भर यहां शिव भक्तों, सैलानियों व पर्यटकों का मेला लगा रहता है।

3. हजारों वर्ष पुराने पद चिन्ह-

ग्राम जामगढ़ में विंध्यांचल पर्वतमाला की पहाड़ी पर रीछड़मल (श्री जामवंत जी) के पदचिन्ह मौजूद है इन्हें जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर के पुरातत्वविद् डॉ आरसी पांडे और मो. वसीम प्रो. कुंअर बजाहत साह ने हजारों वर्ष पुराने होने का दावा किया है. यहां मौजूद पद चिन्ह, शिलालेख व अन्य पुरातत्त्वीय संपदा असुरक्षित और बिखरी होने से वीरान हालत है फिर भी यहां सैलानी, दर्शनार्थियों को यह पर्यटक स्थल आकर्षित करता है और कौतूहल का विषय बना रहता है।

4. पत्थरों पर लिखी लिपी (शिला लेख) –

पद चिन्हों के समीप ही पत्थरों पर अनसुलझी लिपी लिखी है जो आज भी रहस्य बनी हुई है इसे जानकार लोग पहाड़ी पर अनुकृत छिपी हुई सम्पत्ति खजाने की चाबी मानते है इसमें अकूत स्वर्ण भंडार की बीजक है, अनेक लोग इसे जामवंत की गुफा व सुरई मंदिर से जोड़कर देखते है, इस मंतक मणी का रहस्य इसमें मौजूद है, अनके लोग इसे रीछड़मल जी द्वारा लिखा हुआ संदेश मानते है देश के अनेक पुरातत्वविद व खोजी लोग दूरबीन व माइक्रोस्कोप व अनुभव से अभी इस अनसुलझी लिपि का रहस्य जानने व समझने में कामयाब नहीं हुए है।

5. भगवान जामवंत की गुफाएं एवं स्यमंतक मणी एवं सोना –

ऐसा कहा जाता है कि जहां भी स्यमंतक मणी रहती है वहां आठ भार अर्थात एक मन सोना देती है, शायद इसीलिए जामगढ़ स्थित भगवान जामवंत की गुफा में सोना होने की बात हमेशा कोतुहल का विषय रहा है, प्राचीन जामवंत की गुफा एवं अन्य पुरातत्व महत्वपूर्ण स्थान व प्रतिमायें निरंतर उपेक्षित व असुरक्षित बने रहने, बारिस, धूल, धूप के कारण गुफा का द्वारा संकीर्ण हो रहा है, जामवंत की गुफा का द्वार भी बादल की तड़क आकाशीय बिजली व हल्के भूपंकीय झटकों के कारण संकीर्ण होता जा रहा है, गुफा का रहस्य अभी भी रहस्य बना हुआ

है।

6. रहस्यमयी बावड़ी व दुर्लभ जल धारायें

गुफा के बीचों बीच में जहां प्राकृतिक शिवलिंग है वही भीतर एक विशाल बावड़ी है, जिसमें वर्ष भर जल भरा रहता है जो तीर्थ जल की तरह पवित्र माना जाता है अनुमान है कि गुफा पहाड़ी के काफी अंदर तक है। प्राकृत क्षरण जैसे कारण से बावड़ी छोटी होती जा रही है जल कुण्ड के समीप अविरण जल बूंदे पहाड़ी से बूंद-बूंद गिरती रहती है, भीषण गर्मी में पहाड़ी की वनस्पति सूख जाती है लेकिन यहां यह रहस्यमीय जल धारा बूंद-बूंद टपकती रहती है, इस अमृत जल का सेवन गर्मियों में मधुमक्खी अपनी प्यास बुझाने में करती है। इस अमृत जल से अनेक चर्म रोग व असाध्य रोगों में लगाने से फायदा मिलता है।

7. हजारों टन वजनी झूलती विशाल चट्टान –

हजारों टन वजन वाली झूलती विशाल चट्टान रीछड़मल जी द्वारा किसी खास उददेश्य से तरासी गई थी जो शिव गुफा के समीप सीधी खड़ी है. आंधी तूफान एवं हाथ से हिलाने पर हिलती हुई महसूस होती है, मुत्वाकर्षण के कारण आज तक गिरी नहीं है, यह अजूबा शिव गुफा के नजदीक पत्थर की खदान के पास  कैला देवी मठ के सामने मौजूद है।

8. पर्यटन

जामवंत जल प्रपात अटखेलियां करती अविरल जल धारायें –

पर्यटकों को लुभाता है वाटरफॉल हरी भरी वादियों में अटखेलियां करती अविरल जल धारायें विध्यांचल पर्वतमाला की जामवंत गुफा व आसपास की अन्य गुफाओं की श्रृंखला में पर्वतमाला के शिखर से वर्षाकाल में अनेक जल धारायें तलहटी से गिरती है, जिससे सारी पहाडी दूधिया हो जाती है, जामवंत जल प्रपात वर्षा काल में प्रवाहित होता रहता है। यहां सैलानी व पर्यटक वाटरफॉल वर्षाकाल में सैकड़ों की संख्या में आते है।

9. कठिन है डगर संरक्षण की दरकार

ऐतिहासिक पुरातत्वीय धार्मिक प्राचीन पर्यटन के महत्व के कारण ग्राम जामगढ़ को शासन द्वारा पर्यटन स्थल घोषित किया गया है जिसे आज प्रशासनिक संरक्षण की दरकार है लेकिन सड़क,

बिजली, व रख रखाव की उचित व्यवस्था न होने के कारण श्रध्दालुओं, पर्यटकों व सैलानियों को सुगम मार्ग के अभाव में कठिनाई होती है। भक्तों, सैलानियों, पर्यटकों को ठहरने हेतु धर्मशाला एवं आवगमन हेतु सड़क मार्ग की सुविधा के लिए समाजसेवी  कमलकिशोर शर्मा

जी द्वारा निम्न मांग शासन से की गई-

(1) ग्राम जामगढ़ से जामवंत जी की गुफा एवं शिवगुफा हेतु पहुंच मांर्ग।

(2) ग्राम जामगढ़ से वापोली धाम पक्की सड़क।

(3) ग्राम जामगढ़ से हमीरगंज।

(4) ग्राम जामगढ़ से हरडोब।

पक्के सड़क मार्ग बनने से पर्यटकों, सैलानियों को व शिवभक्तों को बढ़ावा मिलेगा एवं आसपास के ग्रामीण विद्यार्थियों को हाईस्कूल, संस्कृत पाठशाला एवं क्षेत्रीय ग्रामीणों प्रा. स्वास्थ्य केन्द्र, पशु चिकित्सालय, सह. समीति, साप्ताहिक बाजार आने जाने में सुविधा होगी।

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