-कमल याज्ञवल्क्य सिटी बीट न्यूज बरेली रायसेन

बरेली। गुरुवार का दिन जामगढ़ के लिए ऐतिहासिक और रोमांचकारी साबित हुआ। विंध्याचल पर्वत की ऊँचाई पर स्थित प्रसिद्ध जामवंत गुफा में उस दृश्य को जीवंत होते देखने का अवसर मिला, जिसने द्वापर युग के प्रसंगों को लोकमानस में अमर कर दिया है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा घोषित श्रीकृष्ण पाथेय के भोपाल संभाग के एकमात्र पड़ाव जामगढ़ में खजुराहो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के लिए शॉर्ट फिल्म की शूटिंग हुई। बड़ी संख्या में जुटे स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने इसे इतिहास का दुर्लभ पुनर्सृजन बताया।
जामगढ़ को मिली आधिकारिक पहचान, बढ़ा महत्व
जामगढ़ लंबे समय से पुरातत्व, इतिहास और धार्मिक अध्ययन के लिए विशेष स्थान रहा है। यहां देश-विदेश से शोधकर्ता, भक्त और पर्यटक आते रहे हैं। बीते वर्ष मध्यप्रदेश शासन ने मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल की विशेष रुचि और प्रस्तुति के कारण जामगढ़ को श्रीकृष्ण की ससुराल के रूप में श्रीकृष्ण पाथेय में शामिल कर इसकी ऐतिहासिक मान्यता को आधिकारिक रूप प्रदान किया। प्रदेश के विभिन्न विभाग अब यहां पर्यटन और धार्मिक विकास से संबंधित योजनाएँ तैयार कर रहे हैं। श्रीकृष्ण पाथेय में प्रदेश के उन आठ प्रमुख स्थलों को शामिल किया गया है, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण का आगमन हुआ था।
क्या-क्या फिल्माया गया

शूटिंग का संपूर्ण दृश्य जामवंत गुफा के भीतर और उसके आसपास ही फिल्माया गया। दर्शकों की उपस्थिति में निम्न प्रमुख प्रसंगों का चित्रण किया गया श्रीकृष्ण पर स्यमंतक मणि की चोरी का झूठा आरोप मणि की खोज में जामवंत गुफा तक श्रीकृष्ण का पहुँचना श्रीकृष्ण और जामवंत के बीच 27 दिनों तक चला युद्ध के बाद जामवंत को श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप का बोध जामवंत द्वारा स्यमंतक मणि और अपनी कन्या जामवंती का श्रीकृष्ण को सौंपना श्रीकृष्ण–जामवंती विवाह का जीवंत और भावनात्मक फिल्मांकन
इन दृश्यों को देखकर दर्शकों ने कई बार तालियाँ बजाकर कलाकारों की प्रशंसा की।
इनकी रही प्रमुख भूमिका
फिल्म का निर्देशन सुनील सोन्हिया मध्यप्रदेश प्रभारी – खजुराहो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, ने किया। इसकी पटकथा पत्रकार और रचनाकार याज्ञवल्क्य ने लिखी है ।
मुख्य पात्रों में—
मनीष कोरी एवं उनकी टीम, गाडरवारा – जामवंत, श्रीकृष्ण व जामवंती के रूप में
अंकित मैथिल भोपाल सिनेमेटोग्राफर तकनीकी सहयोग – अमित मैथिल, अतिशय जैन, वैभव सक्सेना
दिसंबर में खजुराहो में होगी प्रदर्शित
यह शॉर्ट फिल्म 15 से 22 दिसंबर तक आयोजित होने वाले खजुराहो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में आधिकारिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी। फिल्म पहले ही फेस्टिवल के लिए नामांकित हो चुकी है।
पहाड़ी पर बिना सेट के फिल्मांकन—कठिन लेकिन यादगार अनुभव
निर्देशक सुनील सोन्हिया ने बताया—
धार्मिक और ऐतिहासिक फिल्मों में तथ्यात्मक प्रमाणों का अध्ययन बहुत चुनौतीपूर्ण होता है। द्वापर युग की कथा को किसी कृत्रिम सेट पर नहीं, बल्कि वास्तविक पहाड़ी और गुफा में फिल्माना एक अद्भुत और अविस्मरणीय अनुभव रहा। गांव वालों के प्रेम ने पूरी टीम को अभिभूत कर दिया। यह जीवन की यादगार शूटिंग रही।










