‘मासूमियत पर हमला करने वालों के लिए केवल एक दंड : मृत्युदंड’ !

सिटी बीट न्यूज नेटवर्क बरेली

रायसेन ज़िले के गौहरगंज क्षेत्र में छह वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म की दिल दहला देने वाली घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के सामूहिक विवेक पर एक गहरा प्रहार है। बच्ची का जंगल से लहूलुहान मिलना और गंभीर हालत में उसकी जान बच पाना—यह पूरी कहानी हमारे तंत्र और समाज दोनों से कठोर सवाल पूछती है।

मैं भी एक बेटी का पिता हूँ।
आज समाज में बच्चों के साथ हो रहीं ‘दरिंदगी’ की घटनाएँ मेरे जैसे हर माता-पिता के हृदय को अंदर तक झकझोर रही हैं। हम अपने बच्चों को आँचल में छुपाकर रखते हैं, उनकी आँखों की चमक में भविष्य देखते हैं… और फिर किसी दरिंदे की हैवानियत की खबर पूरे अस्तित्व को कंपा देती है।

न जाने कौन सा राक्षस उस मासूमियत को ‘अपवित्र’ कर दे, जिसके दामन में यदि हमें एक छोटा-सा सुराख भी दिख जाए तो हम पूरी दुनिया में आग लगा देने को तैयार हो जाते हैं। इस हैवानियत का कोई निश्चित चेहरा नहीं होता; यह रिश्तों की ओट में, किसी पड़ोसी की मुस्कान में, या सोशल मीडिया के किसी नकली प्रोफ़ाइल में हमारे बच्चों के आसपास ही घात लगाए बैठा हुआ है।

मध्यप्रदेश एक ऐसे दौर से गुज़र रहा है जहाँ हर माँ-बाप का डर अब सामान्य चिंता नहीं रहा—यह एक ‘निरंतर दहशत’ में बदल चुका है। हर माता-पिता अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर एक मौन चीख के साथ जी रहे हैं।

– मध्य प्रदेश : ‘बच्चों के लिए सबसे असुरक्षित राज्य’

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) रिपोर्टों (2021–2023) के अनुसार, मध्यप्रदेश लगातार तीन वर्षों से बच्चों के खिलाफ अपराधों में देश में शीर्ष पर है।

न्याय की स्थिति : सज़ा दर केवल 35%
परिणाम बताते हैं कि 10 में से लगभग 7 अपराधी सज़ा से बच निकलते हैं।

न्याय की यही धीमी और अपर्याप्त प्रक्रिया अपराधियों को निर्भीक बनाती है, जबकि पोस्को कानून और मृत्युदंड का प्रावधान होने के बावजूद अपराध जारी हैं।

– निर्णायक सुधारों की तत्काल आवश्यकता :-

अब दया नहीं, निर्णय का समय है। बच्चों की सुरक्षा को केवल बहस का विषय नहीं, बल्कि राजकीय और सामाजिक प्राथमिकता बनाना होगा। इसके लिए ये कदम आवश्यक हैं:

* मृत्युदंड को प्राथमिक और अनिवार्य दंड बनाया जाए।
बच्चों के साथ क्रूरतम यौन अपराध के दोषियों के लिए मृत्युदंड किसी अपवाद (दुर्लभतम से दुर्लभ) के रूप में नहीं, बल्कि पहले प्रावधान के रूप में लागू हो। यह न्याय का कड़ा लेकिन नैतिक आवश्यक कदम है।

* जांच और न्याय व्यवस्था में मौलिक सुधार
समयबद्ध जांच: पुलिस जांच की समयसीमा तय हो।

* डिजिटल फोरेंसिक: डिजिटल साक्ष्यों की विशेषज्ञ जांच अनिवार्य की जाए।

* गवाह संरक्षण: गवाह संरक्षण तंत्र को मज़बूत किया जाए।

* निगरानी तंत्र: जिलों के स्तर पर Child Crime Monitoring Cell की स्थापना और फास्ट-ट्रैक अदालतों की कठोर निगरानी सुनिश्चित की जाए।

– हमारा दायित्व:-

* सुरक्षित स्पर्श शिक्षा: बच्चों को अच्छे और बुरे स्पर्श (गुड टच, बेड टच) की जानकारी स्कूलों और घरों में अनिवार्य रूप से दी जाए। दरिंदे हमारे आसपास ही हैं—रिश्तों में, पड़ोस में, इसीलिए बच्चों को ज्ञान से सशक्त करना ज़रूरी है।

* सामुदायिक बहिष्कार: जब तक समाज ऐसे अपराधियों का बहिष्कार नहीं करेगा और चुप्पी नहीं तोड़ेगा, तब तक कोई कानून पर्याप्त नहीं।

– अंतिम निर्णय और संकल्प:-

माता-पिता की व्याकुलता और उनके बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागता भय अब एक मांग है। यह निर्णय स्पष्ट है। मासूमियत पर हमला करने के लिए केवल मृत्युदंड। यही न्याय है। यही सुरक्षा है। यही वह संकल्प है जो मध्यप्रदेश को अपने बच्चों के भविष्य के लिए आज ही लेना होगा।

 

       ✍️ भूपेन्द्र (एक पिता)

  • Related Posts

    SketchUp 2024 License[Activated] Universal x86x64 [Windows] 2026

    🔧 Digest:d3efd31810d91cb3b84981f24dd0d77a🕒 Updated: 2026-03-13 Verify Processor: Dual-core CPU for activator RAM: 4 GB recommended Disk space: 64 GB for patching SketchUp is user-friendly 3D modeling software for design projects. It…

    Read more

    Zodiac Gambling establishment Comment 2026 80 Totally free Spins to possess step 1

    Articles Ideas on how to allege your free spins added bonus Preview of Zodiac Gambling enterprise’s games Hippodrome Internet casino The game in addition to spends Tumble Reels, definition the…

    Read more

    You cannot copy content of this page