नृत्य नाटिका एवं गीत-संगीत से दिखाई भगवान बुद्ध के शांति, समृद्धि तथा विश्व के लिए बंधुता के संदेश की कहानी
बौद्ध विचार पर एकाग्र दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव का आगाज
सिटी बीट न्यूज नेटवर्क रायसेन
रायसेन जिले के सांची स्थित बुद्ध जम्बूद्वीप पार्क में संस्कृति विभाग म.प्र. शासन द्वारा जिला प्रशासन एवं महाबोधि सोसायटी के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव का मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा जिले के प्रभारी मंत्री नारायण सिंह पंवार, स्वास्थ्य राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंत मीणा तथा महाबोधि सोसायटी श्रीलंका के प्रमुख वानगल उपतिस्स नायक थेरो द्वारा दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर प्रभारी कलेक्टर तन्मय वशिष्ठ शर्मा, पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री पंवार ने संबोधित करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध के शांति के संदेश का आज भी महत्व है। दुनिया के अनेक देशों में युद्ध हो रहे हैं, ऐसी स्थिति में भगवान बुद्ध का शांति का संदेश सार्थक है। मानवता के लिए जियो और जीने दो का संदेश महत्वपूर्ण है। सम्राट अशोक के काल में यहां यह स्तूप स्थापित किए गए थे। सांची का महत्व पूरी दुनिया में है। प्रभारी मंत्री पंवार ने कहा कि भगवान बुद्ध के दिखाए रास्ते पर चलकर शांति की स्थापना हो सकती है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की दी हुई सीख को समझते हुए लागों ने बिना किसी डर के अपनी मर्जी से बौद्ध धर्म को अपनाया है।
स्वास्थ्य राज्यमंत्री पटेल ने इस अवसर पर कहा कि जो आध्यात्म में रूचि रखता है, वह किसी धर्म में बंधता नहीं है। देश-विदेश में बौद्ध धर्म का विस्तार हुआ है। सांची नगर में भगवान बुद्ध के शिष्यों की पवित्र अस्थियां स्तूप परिसर में हैं। ऐसे स्थल पर आने का अवसर पुण्य कार्य करने से मिलता है। कार्यक्रम में प्रभारी कलेक्टर शर्मा तथा महाबोधी सोसायटी श्रीलंका के प्रमुख वानगल उपतिस्स नायक थेरो ने भी संबोधित किया।
संस्कृति विभाग मप्र शासन द्वारा जिला प्रशासन एवं महाबोधि सोसायटी के सहयोग से आयोजित इस दो दिवसीय महाबोधी महोत्सव के पहले दिन श्रीलंका की ललिता गोमरा एवं दल द्वारा श्रीलंका के लोकनृत्य एवं गायन की प्रस्तुति दी गई तो भोपाल के पंचशील सांस्कृतिक मंच द्वारा नृत्य एवं गायन की प्रस्तुतियों के माध्यम से ज्ञान, सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर जीवन में शांति, समृद्धि तथा विश्व के लिए बंधुता का संदेश का प्रसार किया गया। भोपाल की संघरत्ना बनकर एवं साथी कलाकारों ने भगवान बुद्ध की जीवन कथा पर केंद्रित नृत्य नाटिका “बुद्ध का त्याग” के माध्यम से भगवान बुद्ध के जीवन आदर्शों से देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को जोड़ा तो भोपाल के द साया बैंड के कलाकारों ने भक्ति संगीत के माध्यम से भगवान बुद्ध के विचारों को मंच पर जीवंत किया।

श्रीलंका के दल ने प्रसिद्ध गीत हिमी सरनामर लोक शिवंकर… से भगवान बुद्ध को नमन किया कर मिथ मल पिपिदेवा… गाकर श्रोताओं के मन को आत्मिक शांति का एहसास कराया। कार्यक्रम को विस्तार देते हुए मंगलम पूजा की प्रस्तुति दी, यह प्रार्थना श्रीलंका में त्योहार के समय भगवान से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए की जाती है। पांच मिनट की इस अद्भूत प्रस्तुति के पश्चात भगवान बुद्ध को समर्पित पारंपरिक सिंहली गीतों की प्रस्तुति दी। कलाकारों ने प्रस्तुति के क्रम को आगे बढ़ाते हुए वेस नृत्य लेकर मंच पर नमूदार हुए। किंवदंती के अनुसार इस नृत्य की उत्पत्ति कोहोम्बा कंकरिया(देवता) नामक एक नृत्य अनुष्ठान से हुई है, जिसे कोहोम्बा याक कंकरिया या कंकरिया भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि मलया राता नामक स्थान के राजा और उसके भाइयों ने पहली कंकरिया नृत्य प्रस्तुति दी थी। इसकी उत्पत्ति भारत की भी मानी जाती है। कलाकारों ने यह नृत्य भगवान बुद्ध को समर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात कलाकारों ने बुद्धं शरणं गच्छामि… गीत पर नृत्य प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए भोपाल के पंचशील सांस्कृतिक मंच के कलाकारों ने भगवान बुद्ध को समर्पित गीतों पर लोक शैली पर आधारित प्रस्तुति दी। 6 कलाकारों ने 10 मिनट की प्रस्तुति के माध्यम से दिखाया कि तथागत बुद्ध ने मनुष्य को पवित्र रहकर बुद्ध धम्म से जुड़ना सीखाया है। पवित्रता का मतलब सिर्फ शरीर की सफाई भर नहीं है, बल्कि दूसरों के अंतर्मन से जुड़कर उनकी भावना को जानकर उन्हें सहयोग करना है ताकि आप अपने साथ दूसरों के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त कर सकें, ऐसा सतत् प्रयास करते रहने को ही पवित्र धम्म कहा गया है। जीवन के इस पवित्र उद्देश्य को कलाकारों ने पवित्रता जीवन में बनाये रखना, यही धम्म है… गीत के माध्यम से बयां किया। नृत्य का निर्देशन कल्पना माणिक ने किया।
पहले दिन की सभा में तीसरी प्रस्तुति भोपाल की संघरत्ना बनकर एवं साथी कलाकारों ने भगवान बुद्ध की जीवन कथा पर केंद्रित नृत्य नाटिका “बुद्ध का त्याग” की दी। नाटिका में एक राजकुमार के सुख,वैभव और महल का जीवन छोड़कर मानवता के कल्याण का मार्ग अपनाने की कथा को पेश किया गया। नाटिका के पहले दृश्य में दिखाया गया कि कैसे राजकुमार सिद्धार्थ जब जीवन के दुःखों,वृद्धावस्था,बीमारी और मृत्यु से परिचत हुए तो उनके मन में वैराग्य का भाव जागा। उनके मन में ये सवाल जागा कि क्या यही जीवन है?दूसरे दृश्य में दिखाया गया कि वे रात्रि की निस्तब्धता में, बिना किसी को जगाए, अपना राज्य,अपनी शान और अपने सुखों का मोह छोड़कर महल का त्याग कर देते हैं और सत्य की खोज पर निकल पड़ते हैं। वन में कठिन तपस्या कर और कष्ट सहकर उन्हें ज्ञान होता है कि न तो अत्यधिक सुख,न अत्यधिक कष्ट,सत्य मध्यम मार्ग में छिपा है… प्राप्त होता है। चौथे दृश्य में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्ति का दृश्य दिखाया गया। नाटिका यह संदेश देते है कि जीवन का सत्य बड़ा सरल है, दुःख मिटाने का मार्ग करुणा है। जब मन का द्वार खुलता है तो ज्ञान का प्रकाश स्वयं फैल जाता है। अंतिम प्रस्तुति में भोपाल के द साया बैंड के कलाकारों ने भक्ति संगीत की प्रस्तुति दी। कलाकारों ने बुद्ध ही बुद्ध है…,करुणा के सागर सुखदाता…,ये बुद्ध की धरती युद्ध ना चाहे…,तथागत बुद्ध आए हैं (जन्मगीत) एवं अमृत वाणी (अँगुली माल की कहानी) आदि की प्रस्तुति देकर अपनी वाणी को विराम दिया।
महाबोधि महोत्सव के दूसरे दिन आयोजित होंगे यह कार्यक्रम
संचालक संस्कृति एनपी नामदेव ने बताया कि समारोह के अंतिम दिन 30 नवंबर को श्रीलंका की ललिता गोमरा एवं साथी कलाकार लोकनृत्य एवं गायन के माध्यम से श्रीलंका की संस्कृति को मंच पर आविर्भूत करेंगे। समारोह की अंतिम सभा अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की होगी, जहाँ सूर्यकुमार पाण्डेय (लखनऊ),स्वयं श्रीवास्तव(उन्नाव), सुमित मिश्रा(ओरछा),अभिसार शुक्ला(दिल्ली),हिमांशी बाबरा(मेरठ),मनु वैशाली(दिल्ली),दीपक शुक्ला(भोपाल) एवं चेतन चर्तित(इंदौर) कविता पाठ करेंगे।












