मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंचा 70, 80, 90 फीसदी वेतन का मामला

BHOPAL. मध्यप्रदेश में नियुक्ति के बाद कर्मचारियों को 3 साल तक पूरा वेतन न देने का मामला अब गरमाता जा रहा है। कर्मचारी संगठन इस वेतन विसंगति और परिवीक्षा अवधि दो से तीन साल करने से नाराज हैं।

कर्मचारियों को पूरा वेतन न देने और परिवीक्षा अवधि को सर्विस बुक में शामिल न करने का मामला जनप्रतिनिधियों के माध्यम से विधानसभा तक भी पहुंचा है। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे कर्मचारियों की रिट पिटीशन पर 11 अगस्त को सुनवाई हो सकती है।

कर्मचारी ईएसबी और एमपीपीएससी के माध्यम से दी जा रही नियुक्तियों में विसंगति का मामला उठा रहे हैं। इसको लेकर अब तक कई बार मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव से लेकर अन्य मंत्रियों से मुलाकात कर अपना पक्ष रख चुके हैं लेकिन सरकार उनकी बात को अनसुना कर रही है।

विधानसभा तक पहुंची आवाज

अब प्रदेश में नवनियुक्त कर्मचारी सरकार पर भेदभाव के आरोप लगा रहे हैं। मध्यप्रदेश में साल 2018 तक नई नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों के लिए परिवीक्षा अवधि दो साल तय थी और वेतन पहले ही महीने से पूरा मिलता था। कमलनाथ सरकार ने इस व्यवस्था में नया प्रयोग किया और परिवीक्षा अवधि बढ़ाकर तीन साल कर दी गई।

इसके साथ ही कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि के पहले साल 70, दूसरे साल 80 और तीसरे साल 90 फीसदी वेतन का प्रावधान किया गया। तब से कर्मचारी इस प्रावधान को बदलने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन सरकार सुन ही नहीं रही। अब कर्मचारियों ने जनप्रतिनिधियों के जरिए अपनी आवाज को विधानसभा तक पहुंचाया है। 

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सर्विस रिकॉर्ड से बाहर परिवीक्षा

परिवीक्षा अवधि बढ़ाने और उसे सर्विस बुक से बाहर रखने के साथ ही तीन साल तक पूरा वेतन न देने के मामले में कर्मचारियों ने हाईकोर्ट की शरण ली है। इस मामले में हाईकोर्ट प्रदेश के मुख्य सचिव सहित करीब 11 विभागों के प्रमुख सचिव और एक जिला एवं सत्र न्यायाधीश को नोटिस जारी कर चुका है।

कर्मचारियों के पूरे वेतन की मांग से संबंधित याचिका पर आगामी 11 अगस्त को सुनवाई हो सकती है। वहीं अब कर्मचारियों की पूरा वेतन और परिवीक्षा विसंगति की मांग मध्यप्रदेश विधानसभा तक पहुंच गई है। सरकार को अब कर्मचारियों के वेतन में इस मनमानी कटौती पर जवाब देना है। यानी कर्मचारियों से जुड़ा एक और मसला विधानसभा और हाईकोर्ट में सरकार का सिरदर्द बढ़ा सकता है। 

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समान ग्रेड-पे पर जारी भेदभाव 

मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने एमपी पीएससी और ईएसबी के जरिए समान ग्रेड पे पर होने वाली नियुक्तियों में वेतन और परिवीक्षा विसंगति पर सवाल उठाए हैं। जुलाई माह में एमपीपीएससी द्वारा ट्रांसपोर्ट सब इंस्पेक्टर के पद पर भर्ती शुरू हुई है।

यह 2800 ग्रेड पे वाला पद है और नियुक्ति के साथ ही 100 प्रतिशत वेतन मिलेगा। इसमें परिवीक्षा अवधि भी दो साल है। जबकि ईएसबी के जरिए माध्यमिक शिक्षक ग्रेड पे 3200 और उच्च माध्यमिक शिक्षक ग्रेड पे 3600 की भर्ती परीक्षा में अलग प्रावधान हैं। इन पदों पर नियुक्त कर्मचारियों को तीन साल तक पूरा वेतन नहीं मिलेगा।

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घोषणा- आश्वासनों की भूलभुलैया

कर्मचारी सरकार और सरकारी मशीनरी के आश्वासन और घोषणाओं में उलझकर रह गए हैं। कमलनाथ सरकार में हुई वेतन कटौती और परिवीक्षा अवधि में इजाफे के विरोध पर पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया था।

अप्रेल 2023 में की गई इस घोषणा के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से शासन को पत्र भेजकर नवनियुक्त शिक्षकों को पहले साल 70 और दूसरे साल से शत प्रतिशत वेतन देने निर्देशित किया गया था। इस पत्र में सीएम की घोषणा के क्रियान्वयन पर कार्रवाई करते हुए उसे रिकॉर्ड में दर्ज किया जाना था।

सितम्बर 2023 में तत्कालीन वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने भी वित्त विभाग के एसीएस को सीएम की घोषणा पर अमल कर पूरा वेतन देने के निर्देश दिए थे लेकिन उन्हें भी नहीं माना गया। सीएम की घोषणा, वित्तमंत्री और सीएमओ के निर्देश के बाद अब सात साल बीत चुके हैं लेकिन सरकारी मशीनरी अब भी रोड़ा अटका रही है। 

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छत्तीसगढ़ ने एक झटके में सुधार

कोरोना काल के दौरान मध्यप्रदेश की तरह पड़ौसी राज्य छत्तीसगढ़ में भी सरकार ने कर्मचारियों की परिवीक्षा अधिक एक साल बढ़ाकर तीन  साल कर दी थी।  वहीं शुरूआती तीन साल में 70, 80 और 90 % वेतन स्टायपेंड के रूप में देने का प्रावधान किया गया था।

सितम्बर 2023 में कर्मचारियों की मांग और वेतन व परिवीक्षा अवधि में असामनता को छत्तीसगढ़ सरकार ने एक झटके में दुरुस्त कर लिया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य के नवनियुक्त कर्मचारियों को 2023 से ही पूरा वेतन मिल रहा है।

परिवीक्षा अवधि से स्टायपेंड की व्यवस्था खत्म कर दी गई है और इसे सर्विस रिकॉर्ड में शामिल किया जा रहा है। पड़ौसी राज्य छत्तीसगढ़ ने कर्मचारियों के विरोध पर वेतन और परिवीक्षा विसंगति को दुरुस्त कर लिया है लेकिन मध्यप्रदेश सरकार और अफसरशाही अब भी आंख बंद किए बैठी है। 

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