Malegaon Blast Case : साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का खुलासा, मोदी- योगी का नाम लेने के लिए किया अत्याचार

मालेगांव ब्लास्ट केस ( malegaon blast case ) में बरी होने के बाद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने शनिवार को मीडिया से बातचीत की। उन्होंने बताया कि उन्हें अत्यधिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उन्हें मोदी, योगी आदित्यनाथ समेत अन्य नेताओं के नाम लेने के लिए दबाव डाला गया। यह घटना बहुत क्रूर थी।

साध्वी प्रज्ञा की आपबीती

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने बताया कि जब उन्हें एटीएस (Anti-Terrorism Squad) ने हिरासत में लिया, तो उन्हें 13 दिनों तक अवैध रूप से रखा गया। उनके अनुसार, इस दौरान उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत प्रताड़ित किया गया। उन्होंने कहा कि जो अत्याचार उन पर किए गए, उनका कोई शब्द नहीं हो सकता, क्योंकि शब्दों की भी अपनी सीमा होती है।

साध्वी प्रज्ञा ने बताया कि इस दौरान एटीएस अधिकारियों ने उन्हें लगातार दबाव डाला। उन्हें यह कहा गया कि अगर वह नरेंद्र मोदी, योगी आदित्यनाथ, मोहन भागवत, सुदर्शन, इंद्रेश और रामजी माधव जैसे नेताओं के नाम लें, तो उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा।

ये खबरें भी पढ़ें…

MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें

मौसम पूर्वानुमान (3 अगस्त) : असम-बिहार में भारी बारिश के आसार, MP में फिर बढ़ेगा तापमान

नाम लेने के लिए दी प्रताड़ना 

साध्वी ने बताया कि अधिकारियों का उद्देश्य उन्हें मानसिक रूप से तोड़ना था और यह सुनिश्चित करना था कि वह झूठ बोलें। उनके अनुसार, उन्हें इस मामले में कई बार झूठ बोलने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने किसी का भी नाम लेने से इंकार कर दिया। साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि इस दबाव के बावजूद उन्होंने कभी किसी का नाम नहीं लिया, क्योंकि वह जानती थीं कि यह सब गलत था।

साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि इस समय जो भी मानसिक और शारीरिक अत्याचार उन्हें झेलने पड़े, वह शायद किसी भी इंसान के लिए असहनीय होते। साध्वी प्रज्ञा ने यह भी कहा कि उन्होंने यह सब इसलिए सहा क्योंकि वह सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रतिबद्ध थीं और कोई भी सच्चाई से मुंह मोड़ नहीं सकता।

ये खबरें भी पढ़ें…

कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने अंतिम समय में रद्द की भागवत कथा, मामला जानकर रह जाएंगे दंग

सीहोर में 1620 करोड़ के 6 उद्योगों का भूमिपूजन, ट्रांसफॉर्मर कारखाने से मिलेगा 400 लोगों को रोजगार

बरी होने के बाद दिया पहला बयान

मालेगांव ब्लास्ट मामले में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को बरी किए जाने के बाद उन्होंने यह बयान दिया। इस फैसले के बाद, उन्होंने कहा कि यह न्याय की जीत है और उन्हें पूरी उम्मीद थी कि एक दिन सच्चाई सामने आएगी। उनके अनुसार, उन्हें लंबे समय तक सजा दी गई थी, लेकिन अब वह पूरी तरह से निर्दोष साबित हुईं।

साध्वी प्रज्ञा ने यह भी कहा कि अब वह समाज की भलाई के लिए काम करेंगी और लोगों तक यह सच्चाई पहुंचाएंगी। उनका कहना था कि उन्होंने जो भी दर्द और कष्ट झेले हैं, वह उन सबका सामना करने के बाद भी अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।

पढ़िए क्या था मालेगांव ब्लास्ट मामला…

मालेगांव ब्लास्ट केस 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में हुआ था, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए। यह ब्लास्ट एक मुस्लिम बहुल इलाके में हुआ, जिससे यह घटना आतंकवादी हमले के रूप में देखी गई। शुरुआत में इसे लेकर कई संदेह थे, लेकिन बाद में इस मामले में हिन्दू आतंकवाद का सिद्धांत सामने आया।

मामले की जांच में एटीएस (Anti-Terrorism Squad) ने कुछ हिन्दू संगठनों के लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें प्रमुख आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल श्रीकांत पुरोहित, और समीर कुलकर्णी थे। इन पर आरोप था कि उन्होंने मालेगांव ब्लास्ट की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया। जांच में यह भी सामने आया कि बम स्वदेशी तरीके से बनाए गए थे।

इस केस को लेकर कई विवाद उत्पन्न हुए, जिनमें आरोपियों के खिलाफ किए गए अत्याचार और जांच की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए। 2017 में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को जमानत मिली और वे भाजपा में शामिल हो गईं। मामले की सुनवाई अब भी चल रही है और 2023 तक कई आरोपियों को बरी कर दिया गया है। यह केस भारतीय न्याय व्यवस्था और आतंकवाद से संबंधित मुद्दों पर व्यापक चर्चाओं का कारण बना है।

मालेगांव ब्लास्ट मामले की टाइमलाइन

वर्ष घटना
2008 (29 सितंबर) दूसरा मालेगांव बम धमाका हुआ। 6 लोग मारे गए और 100 से ज्यादा घायल हुए। हिन्दू आतंकवाद का सिद्धांत सामने आया।
2008 (अक्टूबर) जांच एजेंसियों ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल श्रीकांत पुरोहित और अन्य को गिरफ्तार किया।
2010 (अप्रैल) आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में सुनवाई शुरू।
2016 (फरवरी) एनआईए ने मालेगांव ब्लास्ट मामले में रिपोर्ट पेश की, जिसमें हिन्दू संगठनों के शामिल होने का संदेह।
2017 साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को जमानत मिली। उन्होंने भाजपा जॉइन की।
2018 (सितंबर) कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य न मिलने से सुनवाई में देरी।
2020 (मई) केस की सुनवाई जारी रही, आरोपियों पर नए आरोप लगाए गए।
2023 (मई) मामले में कोई विशेष प्रगति नहीं हुई, कुछ आरोपियों को बरी किया गया।

 

thesootr links

सूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट के साथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें

अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢 🔃🤝💬👩‍👦👨‍👩‍👧‍👧

 

  • Related Posts

    सीएसआईआर–सीबीआरआई द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) लाभार्थियों के लिए ‘आवास सक्षम’ प्रौद्योगिकी प्रदर्शन का आयोजन

    सिटी बीट न्यूज नेटवर्क बरेली रायसेन  सीएसआईआर–केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान(सीएसआईआर–सीबीआरआई),रुड़की ने मध्य प्रदेश सरकार एवं बाल रक्षा भारत के सहयोग से रायसेन जिले के जनकपुर गांव में ‘आवास सक्षम: पीएमएवाई-जी…

    Read more

    4/ Pressant Salle de jeu � 60 � sans avoir í  wager + deux � diesel í  l’époque la presence

    Cashed, il est l’eldorado du jeux ! Machines pour sous parmi ligue, blackjack, fraise, tentative, gaming facilement, l’article engendre par réellement apogees editeurs. Cote la capitale sportifs, nous abritee grace…

    Read more

    You cannot copy content of this page