बाल संप्रेषण गृह के अधीक्षक ने खाना बनाने वाली महिला से मांगे हर महीने दो हजार रुपए, रंगेहाथ पकड़ा

मुश्ताक मंसूरी @ खंडवा

MP के खंडवा जिले में एक भ्रष्ट अधिकारी को लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथ पकड़ लिया। यह अधिकारी खंडवा स्थित बाल संप्रेषण गृह के अधीक्षक हरजिंदर सिंह कौर थे, जिन्होंने महिला कर्मचारियों से रिश्वत की मांग की थी। इस अधिकारी ने खाना बनाने वाली ज्योति पाल से दो हजार रुपए हर महीने रिश्वत की मांग की थी। यह रिश्वत उनकी मासिक सैलरी में से कटौती करके लेना थी। यह मामला जब ज्योति की बेटी ने लोकायुक्त पुलिस को बताया, तो उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।

महिला बाल संप्रेषण गृह में खाना बनाती थी और उसे 12 हजार रुपए प्रति माह मिलते थे। अधिकारी ने महिला से 2 हजार रुपए प्रति माह रिश्वत की मांग की। महिला की बेटी ने लोकायुक्त पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने एक ट्रैप दल भेजा, जिसने अधिकारी को दो माह के 4 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।

रिश्वत के लिए धमकी

यह रिश्वतखोरी का मामला तब सामने आया जब हरजिंदर सिंह कौर ने दो महीने में 4 हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी। उन्हें धमकी दी गई थी कि अगर यह रिश्वत नहीं दी जाएगी, तो महिला को काम से हटा दिया जाएगा। ज्योति पाल, जो इस समय बाल संप्रेषण गृह में खाना बना रही थीं, ने इस अवैध मांग के खिलाफ आवाज उठाई। महिला की बेटी ने लोकायुक्त इंदौर से संपर्क किया और मदद मांगी, जिसके बाद एक ट्रैप दल ने अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।

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लोकायुक्त पुलिस की सक्रियता

इस मामले में लोकायुक्त पुलिस ने बेहतरीन तरीके से कार्रवाई की। ट्रैप दल के प्रभारी आशुतोष मिठास ने बताया कि उन्हें शिकायत मिलने के बाद उन्होंने अधिकारियों को तुरंत इस मामले की जांच शुरू करने के निर्देश दिए। इस दौरान, महिला का फोन सक्रिय था, और ट्रैप दल के अधिकारी उस बातचीत को रिकॉर्ड कर रहे थे। जब ज्योति ने 4,000 रुपए रिश्वत देकर अधिकारी को दिए, तो वह गिड़गिड़ाते हुए यह कहती है कि अब तो उसकी नौकरी नहीं जाएगी। अधिकारी ने जवाब दिया, “अब तो तुम परमानेंट रहोगी,” हालांकि वह यह नहीं जानता था कि इस बार उसे ही अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।

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कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी

लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्ट अधिकारी हरजिंदर सिंह कौर को भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 7 के तहत गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद, अधिकारी को कार्यों की गम्भीरता का अहसास हुआ और यह दिखा दिया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में लोकायुक्त पुलिस कितनी सक्रिय है। इस घटना ने प्रदेश के सरकारी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि वे किसी भी प्रकार के अवैध काम में शामिल न हों, वरना उन्हें कानून के सामने जवाब देना पड़ेगा।

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अधिकारी का भ्रष्टाचार और उसकी धमकी

इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार सरकारी तंत्र में किस तरह से अपनी जड़ें जमाए हुए हैं। जब एक अधिकारी अपनी सरकारी जिम्मेदारी का पालन करने के बजाय अपने निजी लाभ के लिए रिश्वत की मांग करता है, तो यह पूरे तंत्र को दूषित करता है। यह घटना केवल एक व्यक्ति के भ्रष्टाचार को उजागर नहीं करती, बल्कि यह सरकार के लिए एक बड़ा चुनौती है कि कैसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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