सरकार गिरने को लेकर अब कमलनाथ का खुलासा, …और हमारी सरकार गिर गई

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 2020 में कांग्रेस की सरकार गिरने को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह लगता था कि दिग्विजय सिंह राज्य सरकार चला रहे थे, और इस कारण सिंधिया ने कांग्रेस के विधायकों को तोड़कर सरकार गिरा दी थी।

यह बयान कमलनाथ ने तब दिया जब दिग्विजय सिंह ने हाल ही में एक निजी चैनल के पॉडकास्ट में इस बात का खुलासा किया कि अगर कमलनाथ ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से जुड़ी सिंधिया की मांगों को मान लेते तो शायद सरकार न गिरती।

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कमलनाथ का सोशल मीडिया पर खुलासा 

कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए लिखा, “मध्य प्रदेश में 2020 में मेरी सरकार गिरने को लेकर हाल ही में बयानबाजी की गई है।

मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि पुरानी बातें उखाड़ने से कोई फायदा नहीं। लेकिन यह सच है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह लगता था कि सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं, और इसी नाराजगी में उन्होंने कांग्रेस के विधायकों को तोड़ा और हमारी सरकार गिराई।

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दिग्विजय सिंह का बयान 

दिग्विजय सिंह ने हाल ही में एक निजी चैनल के पॉडकास्ट में इस विवाद पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “हमारे पास जिन पर पूरा भरोसा था, उन्हीं ने हमें धोखा दिया। यह आइडियोलॉजिकल क्लैश नहीं था, बल्कि यह एक क्लैश ऑफ पर्सनालिटी था। 

दिग्विजय ने यह भी स्वीकार किया कि अगर कमलनाथ ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से जुड़ी ज्योतिरादित्य सिंधिया की मांगों को मान लेते, तो शायद सरकार गिरने की नौबत नहीं आती। उन्होंने यह भी बताया कि कमलनाथ ने सिंधिया से किए गए समझौते का पालन नहीं किया, और यही वजह थी कि मामला सुलझ नहीं सका और कांग्रेस सरकार गिर गई।

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समझौते का पालन नहीं किया गया: दिग्विजय

दिग्विजय सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका न तो माधवराव सिंधिया से और न ही ज्योतिरादित्य सिंधिया से कोई व्यक्तिगत विवाद था। उनका कहना था कि असली समस्या यह थी कि समझौते का पालन नहीं किया गया, जो कि पार्टी के भीतर एक बड़ी समस्या बन गई और इसका परिणाम सरकार के गिरने के रूप में सामने आया।

क्या थी सिंधिया की मांग? 

सिंधिया की मुख्य मांग ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से जुड़ी थी, और अगर कमलनाथ उस समय उन मांगों को मान लेते, तो शायद यह राजनीतिक संकट सामने नहीं आता। इस मुद्दे पर दिग्विजय सिंह का कहना था कि यह मामला सिर्फ पार्टी की आंतरिक राजनीति का था, और अगर ग्वालियर-चंबल से जुड़ी कुछ समस्याओं को सुलझा लिया जाता, तो सरकार गिरने से बच सकती थी।

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