बिजली विभाग के कार्यपालन यंत्री पर EOW के छापे में हुआ करोड़ों की संपत्ति का पर्दाफाश

MP NEWS: मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा की जा रही कार्रवाई के तहत एक और बड़ा खुलासा हुआ है। इस बार कटनी में पदस्थ बिजली विभाग के कार्यपालन यंत्री उमा शंकर पाराशर के खिलाफ EOW ने आय से अधिक संपत्ति रखने के गंभीर आरोपों की पुष्टि के बाद शनिवार सुबह उनके नरसिंहपुर स्थित ठिकानों पर बड़ी सर्च कार्रवाई शुरू की। इस दौरान टीम को आरोपी इंजीनियर के पास से करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति मिली है, जो उनकी सरकारी आय से कहीं अधिक पाई गई है।

शिकायत से शुरू हुई कार्रवाई

मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, कटनी में पदस्थ कार्यपालन यंत्री उमा शंकर पाराशर के खिलाफ यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई। दरअसल, उनके खिलाफ लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बेहिसाब संपत्ति अर्जित की है। इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जबलपुर स्थित ईओडब्ल्यू इकाई ने प्राथमिक जांच शुरू की। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद 8 मई 2025 को आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत अपराध क्रमांक 89/25 दर्ज कर लिया गया। इसके बाद 10 मई की सुबह उनके घर और फैक्टरी पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया।

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नरसिंहपुर में बने दो आलीशान मकान

ईओडब्ल्यू की टीम जब नरसिंहपुर के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित पाराशर के निवास पहुंची तो वहां दो विशालकाय भवन देखे गए। एक तीन मंजिला तो दूसरा दो मंजिला था। दोनों मकानों में महंगे मार्बल, इटालियन टाइल्स, मॉड्यूलर किचन, झूमर और आधुनिक इंटीरियर से पता चलता था कि यह कोई सामान्य सरकारी कर्मचारी का निवास नहीं हो सकता। इन मकानों की कीमत का अनुमान करीब 1.5 करोड़ रुपये लगाया गया है, जो एक इंजीनियर की घोषित आय से मेल नहीं खाता।

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बिनैर गांव में बायो केमिकल वेस्ट फैक्टरी
मकानों के अलावा टीम को आरोपी के ग्राम बिनैर (निवारी), तहसील करेली, जिला नरसिंहपुर में स्थित एक बायो केमिकल वेस्ट फैक्टरी का भी पता चला। जब टीम वहां पहुंची तो फैक्टरी में चल रहे मशीनों और संसाधनों को देखकर अनुमान लगाया गया कि इसकी कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये से अधिक है। इस फैक्टरी का संचालन कैसे किया जा रहा है, इसमें किस नाम से निवेश हुआ है और इसका लाइसेंस किसके नाम पर है, इसकी भी जांच जारी है। लेकिन यह फैक्टरी पाराशर की आय के स्त्रोतों में सबसे बड़ा और संदिग्ध अंग मानी जा रही है।

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लग्जरी गाड़ियों की भरमार, 6 वाहनों में BMW

पाराशर के पास सिर्फ संपत्ति ही नहीं, गाड़ियों का भी लंबा काफिला है। उनके घर से कुल 6 वाहन बरामद हुए हैं, जिनमें 5 चार पहिया और 1 दो पहिया वाहन शामिल हैं। टीम के अनुसार इनमें BMW, Toyota Fortuner जैसी लग्जरी गाड़ियां भी शामिल हैं। इन वाहनों की अनुमानित कीमत करीब 60 लाख रुपये आंकी गई है। किसी भी सरकारी अधिकारी के लिए इस तरह की गाड़ियों का मालिक होना उसकी घोषित आय से कहीं अधिक की ओर इशारा करता है।

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सोने-चांदी के जेवरात भी मिले

सर्च के दौरान पाराशर के घर से भारी मात्रा में आभूषण भी बरामद हुए हैं। जांच के दौरान कुल 18 लाख 16 हजार 955 रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवर पाए गए। इनमें महिलाओं के गहने, चेन, कंगन, अंगूठी, झुमके आदि शामिल थे। टीम ने इन सभी जेवरातों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कर जब्ती की कार्रवाई की। फिलहाल इनकी वैधता और खरीद के दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

घर का इंटीरियर और इलेक्ट्रॉनिक सामान भी लाखों का

टीम को पाराशर के घर से महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, फर्नीचर, एसी, स्मार्ट टीवी, किचन गैजेट्स, इम्पोर्टेड सोफासेट आदि मिले, जिनकी कीमत लगभग 36 लाख 43 हजार रुपये बताई जा रही है। घरेलू इन्वेंटरी की लिस्ट बनाकर उसे दस्तावेजों में दर्ज किया गया है। जिस तरह से घर को सजाया गया था, वह किसी हाई प्रोफाइल व्यापारी या बड़े उद्योगपति की जीवनशैली से मेल खाता था।

9 बैंक खातों की जानकारी, लेन-देन की जांच शुरू

संपत्ति की जब्ती के अलावा टीम को आरोपी के 9 अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी भी मिली है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इन खातों में बड़े पैमाने पर ट्रांजैक्शन हुए हैं। अब इन खातों की स्टेटमेंट खंगाली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पैसा कहां से आया और कहां खर्च हुआ। यदि इन लेन-देन में संदिग्ध गतिविधियां पाई गईं तो मनी लॉन्ड्रिंग की जांच भी संभव है।

अब तक का कुल आंकड़ा 5.5 करोड़ से अधिक

ईओडब्ल्यू ने बताया कि अब तक की जांच और सर्च ऑपरेशन में पाराशर के पास से कुल 5.5 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ है। लेकिन टीम यह भी मान रही है कि अभी कई और जगहों पर छापे मारे जा सकते हैं और संपत्ति का आंकड़ा बढ़ सकता है। बैंक खातों और दस्तावेजों की पूरी जांच के बाद वास्तविक धनराशि सामने आएगी।

विशेष टीम ने की कार्रवाई

इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व जबलपुर ईओडब्ल्यू के उप पुलिस अधीक्षक श्री ए. व्ही. सिंह, श्री स्वर्णजीत सिंह धामी, श्रीमती लक्ष्मी यादव और श्री मुकेश खम्परिया ने किया। टीम में निरीक्षक प्रेरणा पांडे और अन्य अनुभवी प्रधान आरक्षक एवं आरक्षक शामिल रहे। छापेमारी के दौरान पूरे इलाके में हलचल मच गई थी, लेकिन पुलिस ने संयमित और कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई को अंजाम दिया।

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