कभी घर गृहस्थी तक सीमित ग्रामीण महिलाएं अब दूसरों के लिए बन रहीं प्रेरणा स्त्रोत
सिटी बीट न्यूज नेटवर्क बरेली रायसेन

सरकार द्वारा संचालित आजीविका मिशन ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इस मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से महिलाएं अब अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। रायसेन जिले के सांची विकासखण्ड के ग्राम रतनपुर गिरधारी निवासी श्रीमती सरूपी मीणा आजीविका मिशन से जुड़कर आज आर्थिक रूप में ना सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत भी हैं। श्रीमती सरूपी मीणा द्वारा सांची में रूरल मार्ट का संचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने ड्रोन दीदी के नाम से भी अपनी अलग पहचान बनाई है।
श्रीमति सरुपी मीणा ने बताया कि वह 10वीं तक शिक्षित थी। पति कृषि कार्य करते थे, जिससे बड़ी मुश्किल से परिवार का भरण पोषण हो पाता था। श्रीमति सरुपी अपनी शिक्षा को आगे चालू रखना चाहती थी परन्तु आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने से वह आगे की पढाई नही कर सकी। कुछ वर्ष पहले आजीविका मिशन के कर्मचारियों द्वारा ग्राम में भ्रमण कर महिलाओं को समूह में जुडने हेतु समझाया गया। उस समय तक सरुपी भी पूर्णतः बेरोजगार थी तथा आगे की पढाई जारी रखना चाहती थी परन्तु आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण इनकी इच्छा पूरी नही हो सकी तो उन्होंने सोचा की समूह में जूडने से हो सकता है मुझे आगे बढने का अवसर मिल जाये। समूह से जुड़ने के बाद धीरे-धीरे बचत कर समूह से पैसा लेकर श्रीमती सरुपी ने अपनी आगे की पढाई चालू कर दी। साथ ही उन्होंने समूह निर्माण कार्य एवं अन्य सर्वे कार्य सीआरपी के रूप में करना प्रारम्भ कर मानदेय प्राप्त करने लगी। समूह से रूपए लेकर और समूह के कार्य से प्राप्त मानदेय से उन्होंने एक किराना दुकान प्रारम्भ की। इसके अलावा उन्हें बैंक सखी का कार्य करने का अवसर भी मिल गया। जिससे शाखा प्रबंधक द्वारा उनके समूह का सीसीएल भी कर दिया गया। इस सभी कार्यो से उन्हें प्रतिमाह चार से पांच हजार रू की आमदनी होने लगी। इसके बाद उन्होंने सीएससी सेन्टर का कार्य भी प्रारभ्भ कर दिया जिससे उनकी आमदनी में वृद्धि हुई। श्रीमती सरूपी मीणा द्वारा स्नातक तक शिक्षा पूर्ण कर ली है।
श्रीमती सरूपी मीणा की लगन और मेहनत के कारण उन्हें सांची में रूरल मार्ट का संचालन करने का अवसर मिला। वह रूरल मार्ट में दीदी समूहों के उत्पादों का विक्रय एवं अन्य सामग्री का विक्रय करने का कार्य करती है। इसके अतिरिक्त श्रीमती सरूपी मीणा को वर्ष 2023-24 में नमो ड्रोन योजना का भी लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि नमो ड्रोन योजना में चयनित होने के बाद उन्हें ग्वालियर में ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद उन्हें निःशुल्क ड्रोन दिया गया। कम्पनी से आए इंजीनियर ने भी उन्हें ड्रोन चलाने का पूरा प्रशिक्षण दिया। जिसके बाद वह खेतों में ड्रोन से कीटनाशकों का छिड़काव करने लगी। इस प्रकार उन्हें प्रतिवर्ष लगभग तीन लाख रू की आमदनी हो जाती है। श्रीमती सरूपी मीणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को धन्यवाद देते हुए कहती हैं कि आजीविका मिशन महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ ही समाज में उनका मान-सम्मान भी बढ़ा है।










