परिवहन विभाग के पोर्टल से विकल्प गायब इसलिए BH सीरीज के वाहनों का ट्रांसफर अटका

BHOPAL. केंद्र सरकार की भारत सीरीज में रजिस्ट्रेशन कराने वाले वाहन मालिक अब आरटीओ के चक्कर काटते नजर आ रहे हैं। ये व्यवस्था शासकीय सेवा या कारोबार के चलते बार- बार एक राज्य से दूसरे राज्य में बसने वालों के लिए लाई गई थी। इसका उद्देश्य वाहन मालिकों को अलग-अलग प्रदेश में रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता से राहत देना था।

हालांकि मध्यप्रदेश में परिवहन विभाग की उदासीनता ने केंद्र की इस व्यवस्था को उलझन बना दिया है। परिवहन पोर्टल पर भारत यानी BH सीरीज के वाहनों की रीसेल का विकल्प नहीं खोला गया है। इस वजह से लोग न तो अपने पुराने वाहनों को बेच पा रहे हैं क्योंकि रजिस्ट्रेशन ही ट्रांसफर नहीं हो पा रहा है। 

जिसे सुविधा बताया उसी से दुविधा

केंद्र सरकार ने साल 2021 में वाहनों के राष्ट्रीय स्तर पर पंजीयन की व्यवस्था शुरू की थी। ऐसे वाहनों के पंजीयन के लिए भारत सीरीज यानी BH लाई गई थी। इस सीरीज में पंजीकृत वाहन अलग-अलग राज्यों में रजिस्टर कराने की अनिवार्यता से मुक्त किए गए थे।

एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर पर जाने वाले केंद्रीय अधिकारी- कर्मचारी, कई राज्यों में आने- जाने वाले व्यापारियों ने इस सीरीज में अपने वाहनों को पंजीयन कराया था। अब वाहनों के पंजीयन की केंद्रीय व्यवस्था की तकनीकी खामियों ने लोगों के सामने मुश्किल खड़ी कर दी है। 

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नहीं खुली व्हीकल ट्रांसफर लिंक

भारत सीरीज में पंजीकृत वाहनों को लेकर लोग परेशान हो रहे हैं।  पंजीयन के समय जो गाइडलाइन सुविधाजनक नजर आ रही थी अब वहीं उलझन बन गई है। दरअसल तीन से चार साल पहले भारत सीरीज में रजिस्टर वाहनों को बेचना मुश्किल हो रहा है।

मध्य प्रदेश के परिवहन पोर्टल पर इस सीरीज के वाहनों को बेचने पर अन्य के नाम पर ट्रांसफर करने का विकल्प बंद है। वाहन मालिकों की शिकायतें के बाद भी इसे अब तक खोला नहीं गया है। ऐसे में पुराने वाहन बेंचकर नए लेने का इंतजार कर रहे लोग फंसकर रह गए हैं। 

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15 साल का टैक्स चुकाने की शर्त

जब BH सीरीज को शुरू किया गया था तब वाहन मालिक को एक साथ जमा होने वाले टैक्स में राहत दी गई थी। यानी वाहन मालिक को हर दूसरे साल में वाहन के कुल टैक्स का 2.5 प्रतिशत टैक्स ही जमा करना था। यह रियायत इसलिए दी गई थी ताकि वाहन मालिक का ट्रांसफर होने पर उस राज्य को टैक्स मिल सके।

अब इस व्यवस्था की छिपी शर्त सामने आई है। जिसके तहत वाहन बेचने की स्थिति में पुराने नंबर को सरेंडर करना होगा जबकि दूसरे व्यक्ति के पंजीयन कराने पर नया नंबर जारी किया जाएगा। इसके लिए वाहन के नए मालिक को 15 साल का टैक्स जमा कराना होगा। जबकि इन वाहनों का ढाई से पांच प्रतिशत टैक्स दो से तीन साल में जमा कराया जा चुका है। 
 

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