बंद अस्पतालों के खुले ताले, मप्र आयुष को मिला स्कॉच अवार्ड

 MP News: भोपाल मुख्यालय में बैठे अफसर यदि सुशासन लाने की ठान लें तो प्रदेश की मैदानी तस्वीर बदली जा सकती है। सालभर पहले तक प्रदेशभर की जिला आयुष अस्पतालों में शाम होते ही ताले पड़ जाते थे।

मरीजों की भर्ती करने की बात तो छोड़िए, दिन की ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या भी गिनी-चुनी होती थी। अब तस्वीर बदली हुई है। मरीज भर्ती भी हो रहे हैं और ओपीडी में अपना इलाज कराने वालों की संख्या भी बढ़ी है।

आयुष अस्पतालों की तस्वीर बदलने की यह शुरुआत विभाग में करीब डेढ़ साल पहले अपर सचिव बनाए गए भाप्रसे के अधिकारी संजय मिश्रा ने। सूत्रों के मुताबिक,बीते साल फरवरी तक जिला आयुष अस्पताल शाम पांच बजे तक ही खुलते रहे।

शाम होते ही इनमें ताला पड़ जाता। बिस्तर व्यवस्था के बावजूद मरीजों को भर्ती करने से चिकित्सक परहेज करते मिले। इसके चलते इन मरीजों की संख्या तो शून्य ​थी ही। आयुष की कई डिस्पेंसरी में ओपीडी मरीजों की संख्या भी सिफर मिली। 

आयुष अस्पतालों की यह दुर्दशा देख,सख्ती बरती गई। जिला अस्पतालों को चौबीस घंटे खोले जाने के साथ ही,इनमें ड्यूटी की पाबंदी,आनलाइन निगरानी बढ़ाने के साथ ही वीडियो कांफ्रेंस के जरिए हर 15 दिन में समीक्षा,मरीजों का डेटा मेंटेन करने जैसे कदम उठाए गए। मुख्यालयस्तर से शुरू हुई इस सख्ती से आयुष अस्पताल तो गुलजार हुए ही आयुष चिकित्सा पद्धति के प्रति मरीजों का भरोसा भी बढ़ा। 

ये भी पढ़ें…इंदौर में इंडेक्स अस्पताल आयुष्मान योजना में लूट चुका, PHOENIX हॉस्पिटल में भी खेल, जांच टीम पहुंची

व्यवस्था बदलाव की हुई कद्र, मिलेगा स्कॉच अवार्ड

प्रदेश की आयुष अस्पतालों की व्यव​स्था में आए इस बदलाव की कद्र हुई। विभाग की ओर से पेश दावों के तीन चरणों में परीक्षण के बाद साल 2025 का प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड राज्य के आयुष विभाग को मिलने जा रहा है। यह पहला मौका है जब विभाग को यह राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल होगा।

इसे हासिल करने के लिए विभागीय अपर सचिव संजय मिश्रा को आगामी 20 सितंबर को नईदिल्ली में यह अवॉर्ड दिया जाएगा। विभागीय मंत्री इंदर सिंह परमार ने इसे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बताया। 

ये भी पढ़ें…​राजस्थान के अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों की कमी, खरीद पर कुंडली मार बैठा RMSCL, जानें पूरा मामला

तो क्या पा रहे थे मुफ्त का वेतन?

प्रदेश में आयुष के ​23 जिला अस्पताल,36 विंग व 1773 औषधालय हैं। इनमें एक हजार से अधिक चिकित्सकों समेत अलग-अलग संवर्गों के 6435 अधिकारी,कर्मचारी काम कर रहे हैं। बड़ा सवाल यही कि लंबे अर्से तक जिला अस्पतालों में मरीजों को भर्ती किए जाने से परहेज,आयुष विंग व औषधालयों में शून्य ओपीडी पर इससे पहले ध्यान क्यों नहीं दिया गया। क्या तब इन ​चिकित्सालयों में पदस्थ अधिकारी,कर्मचारी मुफ्त  या नाम मात्र के काम के लिए वेतन पा रहे थे?

thesootr links

सूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट केसाथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें

अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢

🔃🤝💬👩‍👦👨‍👩‍👧‍👧👩

  • Related Posts

    सीएसआईआर–सीबीआरआई द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) लाभार्थियों के लिए ‘आवास सक्षम’ प्रौद्योगिकी प्रदर्शन का आयोजन

    सिटी बीट न्यूज नेटवर्क बरेली रायसेन  सीएसआईआर–केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान(सीएसआईआर–सीबीआरआई),रुड़की ने मध्य प्रदेश सरकार एवं बाल रक्षा भारत के सहयोग से रायसेन जिले के जनकपुर गांव में ‘आवास सक्षम: पीएमएवाई-जी…

    Read more

    4/ Pressant Salle de jeu � 60 � sans avoir í  wager + deux � diesel í  l’époque la presence

    Cashed, il est l’eldorado du jeux ! Machines pour sous parmi ligue, blackjack, fraise, tentative, gaming facilement, l’article engendre par réellement apogees editeurs. Cote la capitale sportifs, nous abritee grace…

    Read more

    You cannot copy content of this page