PWD के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच में बड़ा खुलासा, कई ठेकेदार हुए ब्लैकलिस्ट

मध्य प्रदेश की सड़कों, भवनों और अन्य सार्वजनिक निर्माण कार्यों को लेकर लोगों की शिकायतें अब सरकार की प्राथमिकता में हैं। सीएम मोहन यादव की मंशा के अनुरूप  PWD मंत्री राकेश सिंह के निर्देश पर राज्य में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। इसी कड़ी में एक व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें दोषियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है।

35 निर्माण परियोजनाओं की जांच

प्रदेश भर में 35 निर्माण परियोजनाओं की जांच में आधे से अधिक कार्यों में गड़बड़ी उजागर हुई है। औचक निरीक्षण अभियान के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत 7 मुख्य अभियंताओं की टीमें गठित की गईं। इन टीमों ने विदिशा, छिंदवाड़ा, दतिया, इंदौर, मंदसौर, सागर, अनुपपुर और अन्य जिलों में कुल 35 निर्माण परियोजनाओं का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण रेंडम आधार पर किया गया ताकि परियोजनाओं को पहले से तैयारी का अवसर न मिले और वास्तविक स्थिति सामने आ सके। जांच के दायरे में लोक निर्माण विभाग, पीआईयू, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC), भवन विकास निगम और राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित निर्माण कार्य भी शामिल रहे।

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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में हुई समीक्षा

इन निरीक्षणों की रिपोर्टों की समीक्षा एक उच्चस्तरीय बैठक में की गई, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित हुई। इसमें म.प्र. सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भरत यादव, प्रमुख अभियंता (बीएनआर) के.पी.एस. राणा, प्रमुख अभियंता (भवन) एस.आर. बघेल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। निरीक्षणकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों में कई स्थानों पर निर्माण गुणवत्ता में भारी लापरवाही उजागर हुई, जिस पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

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सत्य साईं फ्लाईओवर के ठेकेदार पर होगी कार्रवाई

मनासा-रमपुरा-भानपुरा-झालावाड़ा राज्य मार्ग के निर्माण में घटिया सामग्री और खराब इंजीनियरिंग पाई गई। इस पर संबंधित ठेकेदार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए MPRDC के मुख्य अभियंता को आदेश दिए गए। इंदौर जिले में सत्य साईं फ्लायओवर निर्माण कार्य में अत्यधिक विलंब को गंभीरता से लेते हुए ठेकेदार मेसर्स नारायणदास कंपनी पर कार्रवाई की सिफारिश की गई।

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विदिशा में दोहरी तस्वीर

विदिशा जिले में दो विपरीत तस्वीरें सामने आईं। महामायी मंदिर पहुंच मार्ग (व्हाया पाटन कमालिया) के निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी पाई गई। इस पर ठेकेदार मेसर्स इन्फा डेव्हलपर्स, विदिशा के पंजीयन को कालीसूची में दर्ज करने के निर्देश मुख्य अभियंता, भोपाल परिक्षेत्र को दिए गए। साथ ही संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी करने के आदेश दिए गए। वहीं, विदिशा के शमशाबाद क्षेत्र में विमुक्त जाति प्री-मेट्रिक बालिका छात्रावास भवन का निर्माण गुणवत्ता के सभी मानकों पर खरा उतरा, जिससे निर्माण कार्य में ईमानदारी और पारदर्शिता का उदाहरण सामने आया। इसके लिए ठेकेदार और अधिकारियों की प्रशंसा की गई।

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दतिया में तीन अधिकारियों पर कार्रवाई

दतिया जिले के इंदरगढ़-पढोकर-समथर मार्ग के निरीक्षण में लापरवाही और निम्न गुणवत्ता की पुष्टि हुई। इस पर अनुविभागीय अधिकारी आर.के. मिश्रा की एक वेतन वृद्धि रोक दी गई, उपयंत्री श्री संतोष शर्मा को निलंबित किया गया और उपयंत्री रविकांत सरस्वत की एक वेतन वृद्धि भी रोकी गई। निर्माण कार्य में ठेकेदार मेसर्स प्रेस्टीजियर्स स्कोर्स प्रायवेट लिमिटेड, ग्वालियर की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे, जिस पर उसे कालीसूची में दर्ज करने की कार्रवाई हेतु मुख्य अभियंता, ग्वालियर परिक्षेत्र को निर्देशित किया गया। वहीं सेवढ़ा-स्टेट हाईवे पर शोल्डर निर्माण कार्य में गड़बड़ी पाए जाने पर MPRDC के असिस्टेंट जनरल मैनेजर को नोटिस जारी करने के आदेश दिए गए।

सागर में ROB और स्कूल भवन कार्य में देरी

सागर जिले में जरुआखेड़ा रेलवे ओवरब्रिज (ROB) और सागर-खुरई-बीना सड़क परियोजना में समयसीमा का उल्लंघन पाया गया। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र, भोपाल को संबंधित ठेकेदार पर जुर्माना लगाने और अनुबंध की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। साथ ही रहली क्षेत्र में सी.एम. राइज स्कूल भवन का निर्माण असंतोषजनक स्तर पर पाया गया, जिस पर भवन विकास निगम के उपयंत्री और अनुविभागीय अधिकारी को नोटिस जारी किए गए। साथ ही निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार और सलाहकार फर्म (कंसल्टेंट) पर कार्रवाई के निर्देश भी जारी हुए।

काम में कोताही नहीं होगी बर्दाश्त

इस व्यापक निरीक्षण अभियान के बाद सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि निर्माण कार्यों में कोताही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर जिले में गुणवत्ता मानकों को लेकर संवेदनशीलता जरूरी है और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, लापरवाही या तकनीकी चूक को माफ नहीं किया जाएगा। राकेश सिंह के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग न केवल निर्माण की गुणवत्ता पर ध्यान दे रहा है, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता की एक नई मिसाल भी पेश कर रहा है।

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