पांच माह में रेरा ने रोके 70 कमर्शियल-हाउसिंग प्रोजेक्ट के पंजीयन

BHOPAL. मध्यप्रदेश भू संपदा विनियामक प्राधिकरण यानी रेरा ने पांच माह में 70 से ज्यादा हाउसिंग और कमर्शियल प्रोजेक्ट के आवेदन रद्द किए हैं। इन आवेदनों में कई तकनीकी खामियां सामने आई थीं। इसको लेकर रेरा द्वारा कई अवसर दिए जाने के बावजूद इन कमियों को दूर नहीं किया गया जिसके चलते इन प्रोजेक्टों को रेरा ने रोक दिया है। वहीं इन प्रोजेक्ट में कोई भी प्रॉपर्टी न खरीदने की हिदायत भी लोगों को दी गई है।

रेरा द्वारा सबसे ज्यादा 15 प्रोजेक्ट भोपाल और 9 प्रोजेक्ट इंदौर के निरस्त किए गए हैं। निजी कॉलोनाइजर, बिल्डर्स और प्रमोटर्स के प्रोजेक्ट्स के अलावा मप्र हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेव्लपमेंट बोर्ड, भोपाल विकास प्राधिकरण, कटनी विकास प्राधिकरण, स्मार्ट सिटी भोपाल जैसी सरकारी संस्थाओं के प्रोजेक्ट भी रोके गए हैं।

कमी दूर नहीं कर पाए प्रमोटर- कॉलोनाइजर 

रेरा के पास हाउसिंग- कमर्शियल प्रोजेक्ट के पंजीयन के लिए जनवरी 2025 से 5 जून 2025 के लिए पहुंचे 70 आवेदनों में कई खामियां पाई गई थीं।  स्क्रूटनी के बाद सामने आई तकनीकी और दस्तावेजी कमियों के संबंध में आवेदकों को नोटिस जारी किए गए थे। इन आवेदनों की सुनवाई रेरा बेंच में की गई। इसके साथ ही सुनवाई के बाद आवेदकों को तकनीकी खामियां दूर करने का भी अवसर दिया गया था।

हालांकि आवेदक इन कमियों को पूरा कर जवाब पेश नहीं कर पाए। इसके चलते रेरा ने इन आवेदनों को खारिज कर अपंजीकृत हाउसिंग और व्यावसायिक प्रोजेक्ट को रोक दिया है। लोग इन प्रोजेक्ट के प्रभाव में आकर प्रॉपर्टी न खरीदें इसके लिए भी रेरा ने उन्हें समझाइश दी है। 

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पंजीयन के दस्तावेजों में बड़ी खामियां

रेरा में पंजीयन के लिए पहुंचे हाउसिंग प्रोजेक्ट के जमीन संबंधी दस्तावेजों की जानकारी, स्वीकृत नक्शे में कमी, बैंक स्टेटमेंट, भूमि स्वामी या स्वत्व संबंधी दस्तावेज अधूरे होने सहित कई अहम जानकारियों में त्रुटि मिली है। निजी क्षेत्र के कॉलोनाइजर, बिल्डर्स और प्रमोटर्स के आवेदनों में कई तकनीकी विसंगतियां भी पाई गई हैं।

इनमें पूर्ण में स्वीकृत प्रोजेक्ट के पूरे होने के साथ ही अन्य जानकारियां छिपाई गई हैं। निजी क्षेत्र के अलावा हाउसिंग बोर्ड, बीडीए यानी भोपाल विकास प्राधिकरण, केडीए यानी कटनी विकास प्राधिकरण, स्मार्ट सिटी भोपाल के आवेदनों को भी निरस्त किया गया है। 

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सबसे ज्यादा भोपाल के प्रोजेक्ट खारिज

सरकार लगातार नियम विरुद्ध कॉलोनियों पर कसावट कर रही है। हर कॉलोनी, आवासीय या व्यावसायिक प्रोजेक्ट के निर्माण से पूर्व उसका रेरा पंजीयन जरूरी है। इसकी गाइडलाइन भी तय है लेकिन पंजीयन संबंधी प्रक्रिया में न केवल कॉलोनाइजर, बिल्डर और प्रमोटर बल्कि सरकारी संस्थाओं के अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आ रही है।

साल 2025 में ऐसी ही लापरवाहियों के चलते प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र के पंजीयन रेरा द्वारा अस्वीकृत कर दिए गए हैं। इनमें राजधानी भोपाल के 15, इंदौर के 9, जबलपुर के 4 और उज्जैन के 2 बड़े आवासीय प्रोजेक्ट शामिल हैं।  

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सरकारी प्रोजेक्ट के पंजीयन में ये कमियां 

भोपाल विकास प्राधिकरण :

प्राधिकरण की ओर से बावड़िया कलां में बस टर्मिनल और आवासीय कॉम्पलेक्स विद्यानगर फेस- 2 के पंजीयन के लिए आवेदन किया गया था। इसमें सात कमियां रेरा के सामने आई थीं। जिनमें प्रोजेक्ट के भूखंड पर स्वामित्व के संबंध में बीडीए द्वारा कन्वियेंस डीड पेश नहीं की। 

वहीं संशोधित अनुबंध पत्र में बीडीए के स्थान पर दूसरे व्यक्ति को भूमि स्वामी दर्शाया गया है। प्रोजेक्ट के लिए भूमि स्वामी द्वारा भूमि अर्जन के बदले मुआवजे की प्रत्याशा में आधिपत्य सौंपा गया लेकिन उसे मुआवजा राशि के भुगतान का प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया गया।  

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भोपाल स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन :

स्मार्ट सिटी डेव्लपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा पेश एबीडी स्मार्टसिटी लैंड पार्सल फेस- 4 के आवेदन में 9 खामियां मिली हैं। लैंड पार्सल फेस- 2 और एबीडी कमर्शियल कॉम्पलेक्स का कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र पेश नहीं किया गया। भूमि का उपयोग परिवर्तन कर उसे आवासीय नहीं कराया गया। 

प्रोजेक्ट की भूमि के अंतरण को लेकर राजस्व विभाग का आदेश भी पेश नहीं किया गया। भूमि हस्तांतरण का पंजीयन और रजिस्ट्री भी उपलब्घ नहीं कराई गई। आवेदक अधिकारी के हस्ताक्षर भी प्रमाणित नहीं पाए गए। प्रोजेक्ट के शैड्यूल और इकाइयों की संख्या में समानता नहीं। 

कटनी विकास प्राधिकरण :

केडीए ने झिंझरी में 6 हैक्टेयर से अधिक भूमि पर प्लॉट डेव्लपमेंट प्रोजेक्ट के पंजीयन का आवेदन किया था। स्कीम नंबर- 1 के आवेदन में कई कमियां मिली हैं। प्रोजेक्ट के ले-आउट प्लान की फीस 4,04,532 निर्धारित थी लेकिन केवल 3,64,399 ही जमा कराए गए। सीए द्वारा पेश जानकारी निर्माण से संबंधित है जबकि यह प्रोजेक्ट प्लॉट विकसित करने वाला है। 

सीए के प्रमाण पत्र में कटनी डेव्लपमेंट अथॉरिटी को प्रमोटर दर्शाया गया है। जबकि इंजीनियर सर्टिफिकेट में प्रमोटर सीईओ कटनी दर्ज है। भूमि के स्वामित्व के दस्तावेज और केडीए को आवंटित भूमि के खसरा दस्तावेज भी पेश नहीं किए गए। प्रोजेक्ट में विकिसित किए जाने वाले प्लॉटों की संख्या भी अलग- अलग दर्शायी गई है। 

मप्र हाउसिंग एंड इंफ्रा. डेव्लपमेंट बोर्ड :

1.  हाउसिंग बोर्ड द्वारा टीटीनगर क्षेत्र में बिजनेस पार्क प्रोजेक्ट के पंजीयन के लिए आवेदन किया गया था। आवेदन से संबंधित खामियों में सुधार के लिए 17 बिंदुओं पर जवाब तलब किया गया। इसमें बिल्ड़ंग प्लान में इकाइयों की गणना स्पष्ट नहीं थी। भारमुक्ति के शपथ पत्र की मूल प्रति जमा नहीं कराई गई। प्रोजेक्ट के लिए हाउसिंग बोर्ड द्वारा खरीदा गया प्लॉट नंबर 53 खसरा में स्मार्ट सिटी के नाम पर दर्ज है। हाउसिंग बोर्ड द्वारा बीते पांच साल में पूरे किए प्रोजेक्ट का ब्यौरा नहीं दिया गया। प्रोजेक्ट प्लॉट नंबर 53 पर प्रस्तावित है जबकि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से अनुमति प्लॉट नंबर 58 के लिए ली गई है। आवेदन भी निर्धारित फॉर्मेट में नहीं किया गया। प्रोजेक्ट के शेड्यूल में इकाइयों की संख्या 30 दर्शाई गई है जबकि फीस की गणना में इन्हें 29 बताया गया है। कमर्शियल प्रोजेक्ट होने के बावजूद एग्रीमेंट सेल फॉर अपार्टमेंट और प्लॉट का पेश किया गया। 

2. हाउसिंग बोर्ड की धार डिवीजन द्वारा झाबुआ के माधौपुरा में आवासीय और कमर्शियल प्रोजेक्ट के पंजीयन के लिए आवेदन किया गया था। करीब 4 हैक्टेयर के इस प्रोजेक्ट का आवेदन भी खामियों से भरा है। प्रोजेक्ट में निर्माण की अनुमति के बिना 13 दुकान बनाना दर्शाया गया है। खसरे में शासकीय दर्ज होने के बावजूद भूमि स्वामी कार्यपालन यंत्री को बताया गया। भगतसिंह कॉलोनी प्रोजेक्ट झाबुआ और एकलव्य परिसर अलीराजपुर की पूर्णता का प्रमाण पत्र पेश नहीं किया गया। सीए के दस्तावेजों में प्रमोटर एमपीएचआईडीबी धार और इंजीनियर के सिर्टिफिकेट में एक्जीक्युटिव इंजीनियर धार बताया गया है। प्रोजेक्ट में बनने वाले आवास और दुकानों की संख्या अलग दर्शायी गई है। बिल्ड़िंग प्लान में पार्किंग का ब्यौरा दर्ज नहीं है। 

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