एमपीपीएससी की खनिज अधिकारी-आयुष व्याख्याता भर्ती परीक्षा में ओबीसी आरक्षण अलग क्यों

BHOPAL. मध्यप्रदेश की भर्ती परीक्षाओं से विवादों का गहरा नाता है। एक मामला ठंडा नहीं पड़ता कि दूसरा खड़ा हो जाता है। अब मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की दो भर्तियों में पक्षपात सामने आया है। समान पदों पर हुई दो भर्ती परीक्षाओं में आयोग ने दोहरे मानदंड अपनाए हैं।

खनिज अधिकारी परीक्षा में ओबीसी आरक्षण की अलग व्याख्या की गई है तो आयुष व्याख्याता के पदों पर भर्ती में अलग व्यवस्था रखी गई है। अब आयोग के इस पक्षपात पर अभ्यर्थियों द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं। 

बराबर पद, लेकिन आरक्षण अलग

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा साल 2023 में आयुष विभाग के लिए व्याख्याता (रचना शरीर) के 9 पदों पर भर्ती परीक्षा ली गई थी। एससी में 2, एसटी में 4, ओबीसी में 2 और अनारक्षित श्रेणी में एक पद रखा गया था। इसमें से महिला अभ्यर्थियों के लिए एससी, एसटी और ओबीसी कैटेगरी में 1 पद सुरक्षित किया गया था। 12 सितम्बर 2024 को साक्षात्कार के बाद इसका परिणाम घोषित किया गया।

वहीं दूसरी भर्ती परीक्षा खनिज अधिकारी के 9 पदों पर ली गई थी। इन 9 पदों में से एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी दो-दो पद सुरक्षित रखे गए जबकि अनारक्षित श्रेणी में एक पद आया था। आरक्षित श्रेणी के इन पदों में एक-एक एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी में महिला अभ्यर्थियों के लिए सुरक्षित किए गए थे। 

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ओबीसी आरक्षण की दोहरी व्यवस्था

लोक सेवा आयोग की खनिज अधिकारी और आयुष व्याख्याता भर्ती में ओबीसी आरक्षण की अलग-अलग व्याख्या भी चौंकाने वाली है। आयुष व्याख्याता भर्ती में में ओबीसी के लिए आरक्षित दो पदों को आयोग ने अपने ही 87-13% के फार्मूले से बाहर रखा है।

आयोग द्वारा जारी शुद्धिपत्र के दूसरे बिंदू में इस रियायत को स्पष्ट किया गया है। जिसमें कहा गया है कि चूंकि विज्ञापित पदों में ओबीसी कैटेगरी के पदों की संख्या 2 है। इस वजह से 87-13% फार्मूले के तहत पदों के विभाजन की आवश्यकता नहीं है। इस परीक्षा का परिणाम दोनों पदों को 87% प्रतिशत मुख्य भाग में रखकर घोषित कर दिया गया।

वहीं खनिज अधिकारी भर्ती में ओबीसी आरक्षण के तहत 87-13% फार्मूले की पाबंदी रखी गई है। इस भर्ती में ओबीसी कैटेगरी के 2 पदों में से एक को मुख्य भाग में जबकि दूसरे पद को प्रावधिक में शामिल किया गया है। यानी अब दो में से केवल एक पद पर ही परिणाम जारी किया जाएगा। 

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प्राथमिकता से दूर एमपी की महिलाएं

इससे पहले भी एमपीपीएससी संस्कृत विषय की सहायक प्राध्यापक परीक्षा 2022 में मध्यप्रदेश की मूल निवासी महिलाओं की अनदेखी कर चुका है। महिलाओं को सरकारी नौकरी में प्रतिनिधित्व देने के लिए किए गए प्रावधान के बावजूद कैटेगरी के आधार पर निर्धारित आरक्षण और उनमें सुरक्षित महिला वर्ग के पदों पर दूसरे राज्यों की महिला अभ्यर्थियों को मैरिट के आधार पर परिणाम घोषित करने से नियुक्ति मिल रही है। 

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