महानगर नागरिक सहकारी बैंक : डेली कलेक्शन एजेंट्स के खातों में मिली 15 करोड़ की रकम

MP की राजधानी भोपाल स्थित महानगर नागरिक सहकारी बैंक में आयकर विभाग ने बुधवार को सर्वे शुरू किया। सर्वे गुरुवार तक चला। इसमें बैंक के डेली कलेक्शन एजेंट्स के खातों में वित्तीय हेरफेर का मामला सामने आया। आयकर विभाग ने पाया कि कलेक्शन एजेंट्स ने बैंक में राशि जमा करने के बजाय अपने व्यक्तिगत खातों में लाखों रुपए जमा किए और बाद में उन्हें बैंक खातों में ट्रांसफर किया।

15 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का खुलासा

आयकर विभाग की जांच में यह खुलासा हुआ कि 2024-25 में 15 करोड़ रुपए डेली कलेक्शन एजेंट्स के खातों में जमा किए गए थे। इसके बाद यह राशि बैंक में ट्रांसफर की गई। इसी तरह की गड़बड़ी 2022-23 और 2023-24 में भी पाई गई, जिसमें करोड़ों रुपए कलेक्शन एजेंट्स के खातों में जमा हुए थे। यह एक बड़ी वित्तीय अनियमितता को दर्शाता है, जहां नियमों का पालन नहीं किया गया।

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बैंक के लिए निर्देश

आयकर विभाग ने बैंक प्रबंधन को निर्देश दिया है कि कलेक्शन एजेंट्स के खातों में राशि जमा करने के बजाय बैंक के खातों में ही राशि जमा कराई जाए। इसके अलावा, बैंक को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि भविष्य में सभी बड़ी लेन-देन की जानकारी आयकर विभाग को दी जाए।

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बड़ी रकम के लेन-देन की सूचना न देना

आयकर विभाग ने पाया कि बैंक ने बड़ी रकम के लेन-देन की जानकारी आयकर विभाग को नहीं दी थी। विशेष रूप से, जब बचत खाते में 10 लाख रुपए से अधिक की नकद राशि जमा होती है, तो यह जानकारी आयकर विभाग को दी जानी चाहिए थी, जो इस मामले में नहीं की गई। नियमों का पालन न करने के कारण बैंक के खिलाफ कार्रवाई की गई।

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3 पॉइंट्स में समझें पूरी स्टोरी समझें 

👉 भोपाल के महानगर नागरिक सहकारी बैंक में आयकर विभाग ने कलेक्शन एजेंट्स के खातों में वित्तीय हेरफेर की जांच के लिए सर्वे किया। इस जांच के दौरान बैंक के डेली कलेक्शन एजेंट्स द्वारा राशि को अपने व्यक्तिगत खातों में जमा कर बैंक में ट्रांसफर करने का मामला सामने आया।

👉 आयकर विभाग की जांच में यह सामने आया कि 2024-25 में 15 करोड़ रुपये कलेक्शन एजेंट्स के खातों में जमा हुए थे, जिन्हें बाद में बैंक में ट्रांसफर किया गया। इसके अलावा, 2022-23 और 2023-24 में भी इसी तरह की वित्तीय गड़बड़ी पाई गई।

👉 आयकर विभाग ने बैंक प्रबंधन को निर्देश दिया कि भविष्य में कलेक्शन एजेंट्स के खातों में राशि जमा करने की बजाय सीधे बैंक के खातों में राशि जमा की जाए। साथ ही, सभी बड़ी लेन-देन की जानकारी आयकर विभाग को दी जाए।

आयकर विभाग की कार्रवाई

आयकर अफसरों की टीम ने आयकर अधिनियम की धारा 133 ए के तहत बैंक में स्पॉट वेरिफिकेशन की कार्रवाई की। इस दौरान, 50 लाख रुपए से अधिक की राशि के लेन-देन की जानकारी न देने और 10 लाख रुपए से अधिक की नकद राशि से फिक्स डिपॉजिट या टाइम डिपॉजिट बनाने की जानकारी न देने में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।

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क्या कहते है नियम? 

आयकर अधिनियम के तहत कोआपरेटिव, सरकारी और प्राइवेट बैंकों को जानकारी देनी होती है। यदि चालू खाते में 50 लाख से अधिक या बचत खाते में 10 लाख से अधिक नकद जमा किया जाए, तो पूरी जानकारी देना जरूरी है। इसके अलावा, 10 लाख रुपये से अधिक नकद राशि से फिक्स डिपॉजिट या टाइम डिपॉजिट कराने पर भी जानकारी देना आवश्यक है।

यह जानकारी आयकर अधिनियम की धारा 285 बीए के तहत देनी होती है। इसी तरह, रजिस्ट्रार और सब रजिस्ट्रार के दफ्तर में 30 लाख रुपये से अधिक की रजिस्ट्री की जानकारी भी आयकर विभाग को देनी होती है। कानूनी जानकारी से बचने के लिए यह सूचना दी जाती है, लेकिन कई बार बैंकों और रजिस्ट्रार दफ्तरों द्वारा इसे नहीं दिया जाता है।

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