मितानिनों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से टीकाकरण और स्वास्थ्य योजनाएं प्रभावित

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली करीब 72,000 मितानिनें (आंगनबाड़ी कार्यकर्ता) 7 अगस्त 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं, विशेष रूप से टीकाकरण और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ के बैनर तले मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर और ब्लॉक कोऑर्डिनेटर पूरे राज्य में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। दुर्ग जिले की 1,558 मितानिनें भी इस आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जिससे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ा है।

ये खबर भी पढ़ें… छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जर्जर स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर शिक्षा विभाग को किया तलब

हड़ताल का कारण, अनदेखी और अधूरे वादे

मितानिनें लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार के समक्ष आवाज उठा रही हैं। दुर्ग जिले की ब्लॉक समन्वयक सावित्री मानिकपुरी ने बताया कि मितानिनें सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं, जैसे टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य देखभाल, और अन्य कल्याणकारी योजनाओं को गाँव-गाँव और घर-घर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इसके बावजूद, उनके अधिकारों और मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है। दुर्ग ग्रामीण की मितानिन प्रशिक्षक नीता गायकवाड़ ने बताया कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने मितानिनों के लिए कई बड़े वादे किए थे। इनमें शामिल थे:प्रोत्साहन राशि में 50% वृद्धि: मितानिनों को उनके कार्य के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि में 50% की बढ़ोतरी का वादा किया गया था।

ये खबर भी पढ़ें… हाथीझोला में चार साल से जर्जर स्कूल, बैगा आदिवासी बच्चे पेड़ और आंगनबाड़ी में पढ़ने को मजबूर

एनएचएम में संविलियन : मितानिनों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत स्थायी रोजगार का आश्वासन दिया गया था।
ठेका प्रथा का अंत : मितानिनों के लिए ठेका प्रथा को समाप्त करने की बात कही गई थी।

हालांकि, चुनाव के 11 महीने बाद भी ये वादे पूरे नहीं हुए हैं। इसके उलट, सरकार ने दिल्ली से एक नया गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) लाने का फैसला किया है, जिसे मितानिनों ने अपनी मांगों पर एक और अनदेखी के रूप में देखा है।

ये खबर भी पढ़ें… आंगनबाड़ी में घटिया सामान देने वाली 6 सप्लाई एजेंसी ब्लैक लिस्टेड,कमेटी जांच रिपोर्ट पर एक्शन

हड़ताल का प्रभाव, टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाएं बाधित

मितानिनों की हड़ताल के कारण राज्य में टीकाकरण अभियान और अन्य स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। मितानिनें ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख चेहरा हैं, जो गाँवों में टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, और बच्चों के पोषण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम देती हैं। उनकी अनुपस्थिति में इन सेवाओं का संचालन लगभग ठप हो गया है। दुर्ग जिले में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है, जहां 1,558 मितानिनों के हड़ताल में शामिल होने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि टीकाकरण केंद्रों पर कर्मचारियों की कमी के कारण कई बच्चों और गर्भवती महिलाओं को समय पर टीके नहीं मिल पा रहे हैं। 

ये खबर भी पढ़ें… छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की मेंटल हॉस्पिटल पर सख्ती, अव्यवस्थाओं पर नाराजगी, स्वास्थ्य सचिव तलब

मितानिनों की मांगें और भविष्य

मितानिनों की मांगें केवल आर्थिक नहीं, बल्कि उनकी गरिमा और कार्य की मान्यता से भी जुड़ी हैं। वे चाहती हैं कि सरकार उनके योगदान को गंभीरता से ले और उनके लिए स्थायी रोजगार, बेहतर वेतन, और सम्मानजनक कार्यस्थितियों की व्यवस्था करे। सावित्री मानिकपुरी ने कहा, “हम दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन हमें न तो उचित वेतन मिलता है और न ही सम्मान। हमारी मांगें जायज हैं, और जब तक इन्हें पूरा नहीं किया जाता, हम हड़ताल जारी रखेंगे।

सरकार की प्रतिक्रिया

अभी तक सरकार की ओर से हड़ताल को लेकर कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मितानिनों का कहना है कि सरकार द्वारा बार-बार किए गए वादों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई है। नए एनजीओ को लाने के फैसले ने मितानिनों के बीच और असंतोष पैदा किया है, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह कदम उनकी मांगों को और कमजोर करेगा।

FAQ

मितानिनों की हड़ताल का राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर क्या प्रभाव पड़ा है?

मितानिनों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण राज्य में टीकाकरण अभियान, मातृ-शिशु स्वास्थ्य देखभाल, और पोषण से जुड़ी योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से इन सेवाओं का संचालन लगभग ठप हो गया है, जिससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को समय पर जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।

मितानिनें किन प्रमुख मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं?

मितानिनों की मुख्य मांगें हैं: प्रोत्साहन राशि में 50% की वृद्धि। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में स्थायी संविलियन। ठेका प्रथा का अंत। वे बेहतर वेतन, स्थायी रोजगार और कार्य की सामाजिक मान्यता की भी मांग कर रही हैं।

मितानिनों का सरकार के एनजीओ लाने के फैसले पर क्या रुख है?

मितानिनों का मानना है कि सरकार द्वारा दिल्ली से नया गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) लाना उनकी मांगों की अनदेखी है। इससे उनमें असंतोष और बढ़ गया है क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उनके योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है और उनकी भूमिका को कमजोर किया जा रहा है।

thesootr links

द सूत्र कीt खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट के साथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें

अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃 🤝💬👩‍👦👨‍👩‍👧‍👧

छत्तीसगढ़ मितानिन हड़ताल | मितानिन अनिश्चितकालीन हड़ताल | छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित | मितानिन आंदोलन 2025 | दुर्ग मितानिन हड़ताल

  • Related Posts

    Bet On Red Casino – Schnell‑Spiele, Live-Action & Mobile‑Gewinne

    In einer Welt, in der wenige Minuten deinen Tag verändern können, bietet Bet On Red einen Spielplatz, der auf Geschwindigkeit und sofortige Nervenkitzel setzt. Ob du nach einem schnellen Dreh…

    Read more

    Jeu automatiquement : ayez recours l’action en temps reel

    Battre chez le secteur tous les casinos du orbite peut sembler auguste sur le unique asile, alors qu’ Julius Salle de jeu augmente la fournit. Avec mien bout conviviale et…

    Read more

    You cannot copy content of this page