रातों-रात बनी सड़क तोड़ने का आदेश, गुणवत्ताहीन सड़क निर्माण पर सीएमओ का ठेकेदार को नोटिस

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के घरघोड़ा नगर पंचायत के वार्ड नंबर 5 में एक सड़क निर्माण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। हाल ही में बनी एक सड़क को रातों-रात बना दिया। इस सड़क को सीसी सड़क बना दिया गया था। इसकी भनक स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों को लगी तो उनलोगों ने आपत्ति जताई।

इसके बाद निर्माण रोक दिया गया। नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) ने गुणवत्ताहीन निर्माण को तोड़ने का आदेश जारी करते हुए ठेकेदार को सख्त नोटिस थमाया है। इस कार्रवाई ने क्षेत्र में ठेकेदारों के बीच हड़कंप मचा दिया है।

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क्या है पूरा मामला?

घरघोड़ा नगर पंचायत के वार्ड नंबर 5 में राजू साहू के घर से बाबूलाल के घर तक लगभग 6.04 लाख रुपये की लागत से एक सीसी सड़क का निर्माण स्वीकृत हुआ था। इस कार्य की जिम्मेदारी ठेकेदार दीप्ति मिश्रा को दी गई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस सड़क का दोबारा निर्माण शुरू किया गया, वह पहले से ही पूरी तरह से दुरुस्त और उपयोग के लिए उपयुक्त थी।

 सड़क में न तो कोई दरार थी, न गड्ढे, और न ही किसी मरम्मत की जरूरत थी। इसके बावजूद, रात के अंधेरे में जैक मशीन और निर्माण सामग्री के साथ सड़क को उखाड़ने का काम शुरू कर दिया गया।स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों ने इस कार्य को अनावश्यक और संदिग्ध बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज किया।

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उनका कहना है कि यह निर्माण कार्य बिना किसी तकनीकी कारण के, सुनियोजित तरीके से किया गया, जिसमें कमीशनखोरी और ठेकेदारों की मिलीभगत की बू आती है। लोगों ने इसकी शिकायत नगर पंचायत कार्यालय में की, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और निर्माण कार्य को तत्काल रोकना पड़ा।

सीएमओ की सख्त कार्रवाई

शिकायतों के बाद नगर पंचायत सीएमओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच दल गठित किया और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच के लिए रिपोर्ट मांगी। जांच में पाया गया कि सड़क का निर्माण बिना लेआउट और तकनीकी मार्गदर्शन के किया गया, जो पूरी तरह से मानकों के विपरीत था।

इसके आधार पर सीएमओ ने ठेकेदार दीप्ति मिश्रा को नोटिस जारी करते हुए सख्त निर्देश दिए कि गुणवत्ताहीन सड़क को तत्काल तोड़ा जाए और इसकी सूचना कार्यालय को दी जाए। नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई कि अगर आदेश का पालन नहीं किया गया, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी।

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सीएमओ के इस सख्त रवैये ने न केवल ठेकेदारों में हड़कंप मचा दिया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि गुणवत्ताहीन कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में भी प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ा है।

स्थानीय लोगों का गुस्सा और आरोप

स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क का दोबारा निर्माण न केवल धन की बर्बादी थी, बल्कि यह एक सुनियोजित भ्रष्टाचार का हिस्सा था। उनका आरोप है कि ठेकेदार और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से बिना जरूरत के निर्माण कार्य शुरू किया गया, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा सके। लोगों ने इस मामले को लेकर पहले भी शिकायतें की थीं, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो जनप्रतिनिधियों ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद यह कार्रवाई संभव हो सकी।

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गुणवत्ता नियंत्रण और भविष्य की राह

यह घटना छत्तीसगढ़ में सड़क निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण की कमी को उजागर करती है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) जैसे कार्यक्रमों में भी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तीन स्तरीय गुणवत्ता प्रबंधन तंत्र की व्यवस्था है, जिसमें ठेकेदारों को फील्ड प्रयोगशाला स्थापित कर सामग्री और कारीगरी की जांच करनी होती है।

इसके अलावा, स्वतंत्र मॉनिटर और राष्ट्रीय गुणवत्ता मॉनिटर (एनक्यूएम) द्वारा भी निर्माण कार्यों की निगरानी की जाती है। बावजूद इसके, घरघोड़ा जैसे मामले सामने आ रहे हैं, जो प्रशासनिक लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी को दर्शाते हैं।

FAQ

घरघोड़ा नगर पंचायत में बनी सड़क को तोड़ने का आदेश क्यों दिया गया?

घरघोड़ा नगर पंचायत के वार्ड नंबर 5 में बनी सीसी सड़क की गुणवत्ता खराब पाई गई और उसका निर्माण बिना किसी तकनीकी मार्गदर्शन और लेआउट के किया गया था। शिकायतों के बाद सीएमओ ने ठेकेदार को नोटिस जारी कर सड़क को तोड़ने का आदेश दिया।

स्थानीय लोगों ने सड़क निर्माण को लेकर क्या आरोप लगाए?

स्थानीय लोगों का आरोप था कि जिस सड़क का निर्माण किया गया वह पहले से ही अच्छी स्थिति में थी और मरम्मत की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने इसे धन की बर्बादी और भ्रष्टाचार का हिस्सा बताया, जिसमें ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत होने का शक जताया।

इस घटना से प्रशासन ने क्या संदेश देने की कोशिश की?

सीएमओ की सख्त कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया कि गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे ठेकेदारों में डर पैदा हुआ और स्थानीय लोगों का प्रशासन पर भरोसा बढ़ा।

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